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Bhojshala Survey: भोजशाला में 93वें दिन भी जारी रहा सर्वे, खोदाई में जटाधारी भोलेनाथ व भगवान वासुकी की सात फन वाली मूर्तियां मिलीं

भोजशाला में 93वें दिन खोदाई के दौरान काले पाषाण की सात फनों वाली भगवान वासुकी और जटाधारी भगवान भोलेनाथ की मूर्तियां मिलीं। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा और याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि भगवान वासुकी की मूर्ति का निचला भाग खंडित है। बता दें कि 14 सप्ताह के सर्वे के 98 दिनों में से 93 दिन गुजर चुके हैं।

By Jagran News Edited By: Jeet Kumar Sun, 23 Jun 2024 06:00 AM (IST)
Bhojshala Survey: भोजशाला में 93वें दिन भी जारी रहा सर्वे, खोदाई में जटाधारी भोलेनाथ व भगवान वासुकी की सात फन वाली मूर्तियां मिलीं
खोदाई में 1800 अवशेष मिले हैं, 550 टुकड़े बड़े आकार के

 जेएनएन, धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में शनिवार को सर्वे के 93वें दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की टीम को उत्तरी भाग में खोदाई के दौरान काले पाषाण की सात फनों वाली भगवान वासुकी और जटाधारी भगवान भोलेनाथ की मूर्तियां मिलीं।

पांच दिन और सर्वे होगा

भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा और याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि भगवान वासुकी की मूर्ति का निचला भाग खंडित है। इसी के साथ एक कलश और छह अन्य अवशेष भी मिले हैं। बता दें कि 14 सप्ताह के सर्वे के 98 दिनों में से 93 दिन गुजर चुके हैं। पांच दिन और सर्वे होगा। इसके बाद उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में एएसआइ द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

अब तक 33 मूर्तियां मिलीं

रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा चार जुलाई है। इसी दिन सुनवाई भी होनी है। अब तक 33 मूर्तियां मिलीं - भोजशाला के सर्वे में अब तक 33 मूर्तियां मिल चुकी हैं। इनमें महिषासुर से लेकर भगवान गणेश की दो मूर्तियां, भैरवनाथ सहित मयूर पंख वाले कृष्ण, हनुमानजी, ब्रह्माजी की परिवार सहित मूर्तियां खास हैं। अब तक हुई खोदाई में 1800 अवशेष मिले हैं। इनमें से 550 टुकड़े बड़े आकार के हैं।

संग्रहालय की तर्ज पर रखेंगे अवशेष

शर्मा व गोयल ने बताया कि भोजशाला से जो अवशेष मिले हैं, उनको स्थानीय स्तर पर ही रखे जाने की संभावना है। बरसों पहले यहां से निकले अवशेष, जिन्हें उत्तरी भाग में रखा गया था, उनको अब भोजशाला के सुंदरीकरण के तहत कंक्रीट की दीवार के पास पुरा संग्रहालय की तर्ज पर ही रखने का कार्य शुरू हो गया है। आने वाले समय में इन अवशेषों को लोग यहां देख सकेंगे।