चार किमी दूर स्कूल जाने को मजबूर बच्चों के भविष्य पर ग्वालियर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से दो दिन में मांगा जवाब
ग्वालियर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश में स्कूल स्थानांतरण के बाद बच्चों को 4 किमी दूर पढ़ाई के लिए जाने ...और पढ़ें

ग्वालियर हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
हाई कोर्ट ने स्कूल स्थानांतरण पर सरकार से जवाब मांगा।
ग्रामीण स्कूली बच्चों को 4 किमी दूर स्कूल जाने की समस्या।
आरटीई अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करने का निर्देश।
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में स्कूल स्थानांतरित किए जाने के बाद छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब चार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने सरकार को अतिरिक्त जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय देते हुए स्कूल शिफ्ट करने से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि स्कूल को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का निर्णय लेते समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई) के प्रावधानों पर विचार किया गया था या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
स्कूल शिफ्ट करने के फैसले का पूरा रिकॉर्ड मांगा
यह मामला रसल जाटव की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। सोमवार को सुनवाई के दौरान शासन की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पहले अतिरिक्त जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था। हालांकि, स्कूल स्थानांतरित करने के निर्णय के पीछे की नीति और उससे संबंधित दस्तावेज न्यायालय के सामने रखने के लिए दो दिन का समय देने का अनुरोध किया गया।
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पीठ ने सरकार को अतिरिक्त जवाब प्रस्तुत करने के लिए दो दिन का समय दिया और स्कूल स्थानांतरण से संबंधित पूरा रिकॉर्ड पेश करने को कहा। अब सुनवाई में यह स्पष्ट करना होगा कि निर्णय लेते समय बच्चों की शिक्षा और स्कूल तक पहुंच से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं।
आरटीई के तहत स्कूल की दूरी का मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से शिक्षा का अधिकार अधिनियम के उन प्रावधानों का हवाला दिया गया, जिनमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए स्कूल की दूरी से संबंधित व्यवस्था है।
याचिका में उठाए गए मुद्दे के अनुसार, प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए एक किलोमीटर और कक्षा छठवीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए तीन किलोमीटर की पैदल दूरी के भीतर स्कूल उपलब्ध कराने की व्यवस्था का सवाल महत्वपूर्ण है। स्कूल स्थानांतरित होने के बाद बच्चों को चार किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है, जिसे लेकर अदालत में आपत्ति उठाई गई है।
जर्जर स्कूल भवनों पर भी सरकार से मांगा था जवाब
इससे पहले की सुनवाई में भी हाई कोर्ट ने प्राथमिक स्कूलों के जर्जर भवनों और उनकी मरम्मत नहीं कराए जाने के संबंध में राज्य सरकार से जवाब मांगा था। अब स्कूल स्थानांतरण से जुड़े दस्तावेज तलब किए जाने के बाद मामले में सरकार के फैसले और उसके आधार की न्यायिक जांच होगी।
16 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार के जवाब और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।
