ग्‍वालियर, जागरण आनलाइन डेस्‍क। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 13 जुलाई बुधवार को पड़ रही है। इसे गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषी सुनील चोपड़ा ने बताया कि महर्षि वेद व्यास का जन्म आषाढ़ मास की पूर्णिमा को हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों की रचना की। इसी कारण उन्हें प्रथम गुरु का दर्जा दिया गया है। पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 13 जुलाई को सुबह 4 बजे से शुरू होकर उसी दिन दोपहर 12:06 बजे समाप्त हो रही है।

गुरु मंत्र का मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा पर इंद्र योग सुबह से दोपहर 12:45 बजे तक है। जो व्यक्ति गुरु पूर्णिमा के दिन इस योग में गुरु मंत्र ग्रहण करता है वह सर्वत्र विजयी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार गुरु पूर्णिमा पर मंगल, बुध, बृहस्पति और शनि की अनुकूल स्थिति के कारण शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें रूचक योग, भद्र योग, हंस योग और शश नाम का राजयोग है। इस शुभ योग में गुरु के चरणों की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। जीवन की परेशानियां दूर होती है।

शहर में होते हैं कई कार्यक्रम

गुरु पूर्णिमा पर गिरिराज जी की परिक्रमा के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके साथ ही गुरु पूर्णिमा पर शहर के कई आश्रमों में लोग गुरु पूजा के लिए आते हैं।

वर्जन-

सृष्टि के प्रारंभ से ही गुरु-शिष्य परंपरा का जन्म शैक्षिक ज्ञान, आध्यात्मिकता और आध्यात्मिक अभ्यास के विस्तार और इसे प्रत्येक मनुष्य के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से हुआ था। जो शिष्य को अंधकार से बचाकर प्रकाश की ओर ले जाता है, वह गुरु कहलाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से ऊपर है। इस दिन न केवल गुरु बल्कि परिवार के सभी बड़े सदस्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए और गुरु के रूप में उनका सम्मान करना चाहिए। यह त्योहार पूरे भारत में गुरु के सम्मान में मनाया जाता है।

Edited By: Babita Kashyap