पांढ़ुर्णा में परंपरा के नाम पर खूनी खेल: गोटमार मेले में पत्थरों की बारिश में 1185 घायल; पांच साल के बच्चे का सिर फूटा
मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में परंपरा के नाम पर आयोजित गोटमार मेले में जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 1185 लोग घायल ...और पढ़ें

पांढुर्णा में जाम नदी के पास एक-दूसरे पर पत्थरबाजी करते दो गांवों के लोग। (सौजन्य : इंटरनेट मीडिया)
HighLights
गोटमार मेले में पांढुर्णा और सावरगांव पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई।
इस खूनी खेल में कुल 1185 लोग घायल हुए, सात की हालत गंभीर।
कांग्रेस विधायक नीलेश उईके भी पत्थरबाजी की परंपरा में शामिल हुए।
डिजिटल डेस्क, पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में परंपरा के नाम पर आयोजित गोटमार मेला शुक्रवार को एक बार फिर खूनी खेल में बदल गया। जाम नदी के दोनों तटों पर पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई। इसमें 1185 लोग घायल हो गए। सात घायलों की हालत गंभीर बताई गई है, जिन्हें बेहतर उपचार के लिए नागपुर रेफर किया गया। घायलों में एक पांच साल का बच्चा भी शामिल है, जिसके सिर में चोट आई है।
प्रशासन की सख्ती और धारा 144 लागू होने के बावजूद दोनों पक्षों के लोग नदी के तटों पर बड़ी संख्या में जमा हुए। नदी के दोनों किनारों पर पहले से ही पत्थरों के ढेर नजर आए। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ पथराव शाम तक चलता रहा।
धारा 144 के बावजूद हजारों लोग जुटे
गोटमार मेले की शुरुआत परंपरागत पूजा-अर्चना के साथ हुई। लोगों ने चंडी माता मंदिर में पूजा की और जाम नदी में गाड़े गए पलाश के झंडे की आराधना की। इसके बाद पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के लोगों के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई।
बताया गया कि मेले में सुबह से ही करीब चार हजार से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। दोपहर तीन बजे तक मेले में पहुंचने वालों की संख्या 25 हजार से ज्यादा हो गई।
कांग्रेस विधायक भी पत्थरबाजी में शामिल
गोटमार मेले के दौरान कांग्रेस विधायक नीलेश उईके भी पांढुर्णा पक्ष की ओर से इस परंपरा में शामिल हुए। वे अन्य लोगों के साथ पत्थर बरसाते नजर आए।
प्रशासन ने मेले के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त इंतजाम किए थे, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच पथराव को पूरी तरह रोकना संभव नहीं हो सका।

एक प्रेम कहानी से जुड़ी है खूनी परंपरा
गोटमार मेले को लेकर स्थानीय स्तर पर एक पुरानी किंवदंती प्रचलित है। माना जाता है कि वर्षों पहले सावरगांव की एक आदिवासी युवती और पांढुर्णा के युवक ने परिवार की मर्जी के खिलाफ चोरी-छिपे प्रेम विवाह कर लिया था। दोनों गांव से भागते हुए जाम नदी में फंस गए।
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किंवदंती के अनुसार, दोनों गांवों के लोग नदी के दोनों किनारों पर पहुंच गए और एक-दूसरे पर पत्थर बरसाने लगे। इसी पथराव में युवक-युवती की मौत हो गई। इसके बाद से हर साल इसी घटना की याद में गोटमार मेले की परंपरा चली आ रही है।
हालांकि, समय के साथ यह परंपरा खतरनाक पत्थरबाजी में बदल गई है। अब तक इस खूनी खेल में 13 लोगों की जान जा चुकी है।
