रामधुन, भजन-कीर्तन के साथ अयोध्या की ओर बढ़ते दिग्विजय के कदम; एक पखवाड़े में चले 250 किलोमीटर
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा' ने उज्जैन से अयोध्या की ओर बढ़ते हुए एक पखवाड़े में ...और पढ़ें

राजगढ़ में यात्रा के दौरान ग्रामीणों से आत्मीय चर्चा करते दिग्विजय सिंह।
HighLights
हर जगह दोहराए जा रहे वोट और चढ़ावा चोरी के आरोप
धार्मिक यात्रा में 'वोट चोरी' के राजनीतिक आरोप शामिल।
दिग्विजय की यह यात्रा प्रतिदिन औसत 15 किलोमीटर होती है।
वैभव श्रीधर, भोपाल। शिवधाम अर्थात उज्जैन से 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर प्रारंभ हुई 79 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा एक पखवाड़े में 250 किलोमीटर की दूरी तय करके गुना जिले में प्रवेश कर चुकी है। रामधुन-भजन कीर्तन के साथ रामधाम अर्थात अयोध्या की ओर बढ़ती इस पदयात्रा को यूं तो अराजनीतिक बताया गया लेकिन यह राजनीति से अछूती नहीं है। हर जगह वोट चोरी और चढ़ावा चोरी के आरोप दोहराए जाते हैं। यात्रा में 'वोट चोर-चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे...' जैसे नारे भी सुना देते हैं। यात्रा के पड़ावों पर केवल स्वागत और अभिनंदन नहीं होता बल्कि नेताओं के भाषण भी राजनीति से ओतप्रोत रहते हैं।
इस यात्रा को दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया ने राजगढ़ में सुबह प्रारंभ से लेकर रात्रि विश्राम होने तक साथ-साथ चलकर देखा। कहीं रथ के आगे भजन मंडली रामधुन गाते चल रही है और उसके पीछे दिग्विजय कदमताल कर रहे होते हैं। रास्ते में कहीं बच्चियां तिलक लगाती हैं, महिलाएं आरती उतारकर स्वागत करती हैं। फूल बरसाए जाते हैं।
वैसे तो यह धार्मिक-सांस्कृतिक यात्रा का दृश्य है, लेकिन इसमें राजनीति की एक समानांतर धारा भी चलती दिखती है। रास्ते में नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात, स्थानीय स्तर पर स्वागत मंचों का आयोजन, नेताओं का परिचय और मंचों से दिए जाने वाले भाषण इस यात्रा को राजनीतिक रंग देते हैं।
मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह हर मंच से यात्रा के धार्मिक-सांस्कृतिक उद्देश्य के साथ राजनीतिक मुद्दों को भी जोड़ देते हैं। वोट चोरी और चढ़ावा चोरी के आरोपों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर निशाना साधते हैं और सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं। दिग्विजय के मुख्यमंत्री रहते क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को याद दिलाते हैं। यात्रा के आगे-आगे दिग्विजय की पत्नी अमृता सिंह चलती हैं। रास्ते में रुक-रुककर महिलाओं से बात करती हैं।
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पदयात्रा और जनसंवाद
यात्रा प्रतिदिन औसत 15 किलोमीटर होती है। पहला पड़ाव दोपहर डेढ़ से दो बजे के बीच, उस स्थान पर जहां आसपास के गांवों के लोग पहुंच सकें। यहां भजन के बाद दिग्विजय यात्रा के उद्देश्य पर बात रखते हैं। इसमें राजनीतिक-गैर राजनीतिक सब तरह के प्रश्नों के उत्तर देते हैं। भोजन के बाद करीब डेढ़ घंटे का विश्राम और शाम सवा पांच से साढ़े पांच बजे फिर पदयात्रा, जो रात करीब 10 बजे तक चलती है।
दिग्विजय यात्रा को लेकर कहते हैं कि लोगों को अब यह बात समझ में आने लगी है कि भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद हिंदुत्व को सनातन के रूप में प्रस्तुत करते हैं, वो सही नहीं है। हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है। धर्म सनातन है और इसमें नफरत, विध्वंस का कोई स्थान नहीं है। वोट चोरी स्वाभिमान पर चोट है इसलिए यह भी विषय है।
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