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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 19, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों की सलाह से खुले जंगल में छोड़े जाएंगे चीते, वन्यजीव विविधता को मिलेगा बढ़ावा

By Jagran NewsEdited By: Shashank Mishra
Published: Sun, 19 Feb 2023 09:41 PM (IST)

चीता परियोजना के तहत नामीबिया से पहली बार आठ चीते लाए गए थे जिन्हें कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़े ...और पढ़ें

नामीबिया से लाए गए एक चीते को फरवरी अंत तक छोड़ने की तैयारी
नामीबिया से लाए गए एक चीते को फरवरी अंत तक छोड़ने की तैयारी

राज्य ब्यूरो, भोपाल। दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया से सितंबर 2022 में लाकर कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए आठ चीतों के बाद अब दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाकर क्वारंटाइन बाड़े में छोड़े गए हैं। इधर, नामीबिया से पूर्व में लाए गए चीतों को दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों की सलाह पर खुले जंगल में छोड़े जाने की तैयारी है। भारत में चीतों को बसाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि इससे वन्यजीव विविधता को बढ़ावा मिला है।

भारत की वन्यजीव विविधता को मिला बढ़ावा

पीएम ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र सिंह के ट्वीट को टैग करते हुए कहा कि 12 और चीते मध्य प्रदेश पहुंचने से भारत की वन्यजीव विविधता को बढ़ावा मिला है। बता दें कि चीता परियोजना के तहत नामीबिया से पहली बार आठ चीते लाए गए थे, जिन्हें कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़े में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं छोड़ा था। इन चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ा जा चुका है। अब इनमें से तीन चीतों को खुले जंगल में छोड़ने की तैयारी है।

पिछले दिनों मादा चीता सासा के बीमार होने के कारण प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के साथ आए विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी, यदि वे तैयार हुए तो फिलहाल एक चीते को फरवरी अंत तक खुले जंगल में छोड़ा जा सकता है। इनकी जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम से निगरानी की जाएगी। नामीबिया के विशेषज्ञ वहां के जंगल से पकड़कर लाए गए चीतों को जंगल में छोड़ने के लिए पूरी तरह से फिट बता रहे हैं। अब 18 फरवरी को 12 चीतों को लेकर आए दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों से द्वितीय अभिमत (सेकंड ओपिनियन) लिया जा रहा है। ये विशेषज्ञ अगले कुछ दिन चीतों को देखेंगे।

पार्क की सीमा से बाहर नहीं जा पाएंगे चीते

खुले जंगल में छोड़ने के बाद भी चीतों पर पूरी नजर रखी जाएगी। इसके लिए जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे पार्क के मैदानी कर्मचारियों से लेकर आलाधिकारी जुड़े हैं। पार्क की मैपिंग इस तरह से की गई है कि चीता पार्क की सीमा पर पहुंचे इसके एक किमी पहले ही सिस्टम कर्मचारियों और अधिकारियों को सूचना दे देगा और पार्क की सीमा पर प्रत्येक पांच किमी पर बनाई गई चौकी से टीम पहुंचकर चीता को वापस लौटाएगी। चीते की लोकेशन उसके गले में लगाई गई कालर आइडी बताएगी।

भविष्य की योजना पर मंथन करेंगे विशेषज्ञ कूनो में चीतों की पुनस्र्थापना से अभी तक प्रगति-भविष्य की योजना पर शिवपुरी में सोमवार से दो दिन मंथन होगा। इस कार्यशाला में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति के अध्यक्ष एमके रंजीत, एनटीसीए के सदस्य सचिव एसपी यादव, वन मंत्रालय के महानिरीक्षक अमित मलिक, डब्ल्यूआइआइ के डा. वायपी झाला, चीता विशेषज्ञ डा. स्टीफन ओ-ब्रायन, डा. लारी मार्कर, चीता टास्क फोर्स के अन्य सदस्य सहित नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

जेएस चौहान, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक ने कहा, दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ भी चीतों को जंगल में छोड़ने से सहमत होते हैं तो एक चीते को जल्दी छोड़ देंगे। चीते पार्क की सीमा से बाहर न जाएं, इसके लिए सिस्टम बनाया गया है।

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