व्यापमं के 18 साल पुराने कंप्यूटर घोटाले में नया मोड़, दीमक ने खा लिए मूल दस्तावेज; अब फोटोकॉपी बनेगी सबूत
व्यापमं के 18 साल पुराने कंप्यूटर खरीद घोटाले के मूल दस्तावेज दीमक से नष्ट हो गए हैं। भोपाल की विशेष ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
व्यापमं कंप्यूटर घोटाले के मूल दस्तावेज दीमक से नष्ट हो गए।
विशेष अदालत ने फोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकारा।
78 कंप्यूटरों की खरीद में 43 लाख रुपये के घोटाले का है आरोप।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। व्यापमं (अब कर्मचारी चयन मंडल) के 18 साल पुराने कंप्यूटर खरीद घोटाले में अब मूल दस्तावेजों के बजाय उनकी फोटोकॉपी के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी। भोपाल की विशेष अदालत में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बताया कि मामले से जुड़े मूल शासकीय दस्तावेज रिकॉर्ड रूम में रखे थे, जिन्हें दीमक ने नष्ट कर दिया है।
मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण ईओडब्ल्यू ने उनकी फोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाने का आवेदन दिया था। विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह की अदालत ने आवेदन स्वीकार कर लिया है।
2008 में चालान के साथ जमा हुई थीं प्रतियां
ईओडब्ल्यू की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2008 में जब मामले का चालान पेश किया गया था, तब मूल दस्तावेजों से ही मशीन के माध्यम से उनकी फोटोकॉपी तैयार कराकर अदालत में जमा की गई थी। चालान के साथ इन छायाप्रतियों की प्रतियां बचाव पक्ष को भी उपलब्ध कराई गई थीं। इसके बाद मूल दस्तावेज रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखे गए थे।
लंबे समय बाद रिकॉर्ड रूम में रखे दस्तावेज दीमक से नष्ट हो गए। अब उनके दोबारा मिलने की संभावना नहीं है।
बचाव पक्ष ने प्रामाणिकता पर उठाए सवाल
आरोपित पक्ष ने मूल दस्तावेज नष्ट होने पर आपत्ति जताई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संदीप गुप्ता ने बताया कि रिकार्ड रूम में रखे कई महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज दीमक खा गई हैं। ऐसे में अब उपलब्ध फोटोकॉपी के आधार पर ही मामले की सुनवाई होगी। बचाव पक्ष ने फोटोकॉपी की प्रामाणिकता और मूल दस्तावेजों के नष्ट होने की परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए।
अदालत ने माना कि चालान पेश किए जाने के समय मूल दस्तावेजों से तैयार की गई छायाप्रतियां रिकॉर्ड पर मौजूद हैं और उनकी प्रतियां बचाव पक्ष को पहले ही दी जा चुकी थीं। इसके आधार पर अदालत ने फोटोकापी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड में शामिल करने की अनुमति दे दी। मामले में विवेचक के शेष मुख्य परीक्षण के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है।
16 में से पांच आरोपितों की हो चुकी मौत
यह मामला वर्ष 2008 से अदालत में लंबित है। करीब 18 साल की अवधि में 16 आरोपितों में से पांच की मौत हो चुकी है। इनमें अरुण गुप्ता, पी. प्रकाश राव, अरुण कुमार कालिया, रमेश दुबे और तुलसीदास अग्रवाल शामिल हैं। वर्तमान में वीसी दुबे, आशीष साहू, डॉ. एके श्रीवास्तव, योगेशचंद्र उपरीत, यूएस विजयवर्गीय, अशोक मिश्रा, ओपी सोनी, ओपी टिकारिया, अजय सेन, नितिन महिंद्रा और जावेद अख्तर के खिलाफ मामला चल रहा है। एक आरोपित राधा बैलानी फरार है।
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78 कंप्यूटर और सर्वर की खरीदी में गड़बड़ी का आरोप
ईओडब्ल्यू के अनुसार वर्ष 2008 में व्यापमं द्वारा 78 कंप्यूटर और सर्वर खरीदे गए थे। जांच में आरोप लगाया गया था कि कंप्यूटरों की खरीदी बाजार मूल्य से करीब दोगुनी दर पर की गई। टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर संबंधित फर्म को लाभ पहुंचाने का आरोप है। इससे सरकारी खजाने को करीब 43 लाख रुपये का नुकसान होने की बात जांच में सामने आई थी। शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच की थी।
