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21 साल बाद भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी: रहवासी क्षेत्रों में नहीं खुलेंगे शोरूम-मॉल, हरित क्षेत्र 27% होगा; जानिए कैसे आकार लेगा विकास

Published: Sun, 27 Sep 2026 03:52 PM (IST)

भोपाल मास्टर प्लान 2047 का मसौदा 21 साल बाद जारी किया गया है, जिसका लक्ष्य शहर को आधुनिक और पर्यावरण ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र।

प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. आवासीय क्षेत्रों में शोरूम और शॉपिंग मॉल नहीं खुलेंगे।

  2. शहर का हरित क्षेत्र 12 से बढ़कर 27 प्रतिशत होगा।

  3. निवेश क्षेत्र का विस्तार 1016 वर्ग किमी तक किया जाएगा।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित महानगर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) का मसौदा जारी कर दिया है। करीब 21 साल की देरी से आए इस प्रारूप में शहर की 45 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार किया गया है।

नए मास्टर प्लान में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब आवासीय इलाकों में शोरूम और शॉपिंग मॉल जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। वहीं, शहर में हरित क्षेत्र को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल भी बढ़ाकर 61,017.02 हेक्टेयर कर दिया गया है। वर्ष 2005 की विकास योजना में यह क्षेत्रफल 25,351 हेक्टेयर प्रस्तावित था। यानी नए प्रारूप में विकास योग्य क्षेत्र करीब ढाई गुना हो गया है।

1016 वर्ग किमी में फैलेगा निवेश क्षेत्र, 254 गांव होंगे शामिल

मास्टर प्लान के नए प्रारूप में निवेश क्षेत्र का बड़ा विस्तार किया गया है। इसे बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर तक करने का प्रस्ताव है, जिसमें 254 गांव शामिल होंगे। इसके साथ ही शहर के विकास को गति देने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर और असीमित एफएआर का प्रावधान भी किया गया है।

मास्टर प्लान के मसौदे पर अगले 30 दिनों तक आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से दावे-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इन पर विचार के बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

21 साल की देरी से बढ़ी थीं विकास संबंधी जटिलताएं

भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित था। इस देरी के कारण शहर में निर्माण, भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कई तरह की जटिलताएं पैदा हुईं। इस मुद्दे को लेकर दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया' ने अभियान चलाकर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की तो विवाद बढ़ गया। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मास्टर प्लान लाने की बात कही थी। अब मसौदा जारी होने के बाद शहर के विकास को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद है।

सड़क की चौड़ाई तय करेगी व्यावसायिक गतिविधियां

  • - 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकेंगी। ऐसे क्षेत्र में केवल डाक्टर, वकील, सीए, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, मैनेजमेंट प्रोफेशनल जैसी पेशेवर गतिविधियां ही सिर्फ एक मंजिल तक चलाई जा सकेंगी।
  • - 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क पर भी शोरूम, होटल-कैफे नहीं खुलेंगे। यहां सिर्फ बैंक एटीएम, स्टेशनरी, मेडिकल आदि संचालित किए जा सकेंगे।
  • - 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर नर्सिंग होम, सीमित क्षमता वाले रेस्टोरेंट, होटल-कैफे, कोचिंग संस्थान और शोरूम का संचालन किया जा सके।
  • - 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर शापिंग काम्प्लेक्स संचालित किया जा सकेगा।

हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर, व्यवस्थित विकास की तैयारी

भोपाल विकास योजना-2047 में शहर के पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विस्तार को प्रमुखता दी गई है। हरित क्षेत्र को 12 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। निवेश क्षेत्र के विस्तार, नए ग्रोथ कॉरिडोर और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सड़क की चौड़ाई के आधार पर नियम तय होने से शहर के विकास को व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना है।

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मसौदे पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मास्टर प्लान सामने आएगा। इसके बाद ही प्रस्तावित प्रावधानों के अंतिम स्वरूप और उनके क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी।

यह समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल का रोडमैप

राजधानी की यह विकास योजना (मास्टर प्लान) भोपाल की प्राकृतिक धरोहर- भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। इसमें हरित टीडीआर का बेहतर प्रविधान किया गया है, इससे हरित क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों की क्षतिपूर्ति के साथ विकासकर्ताओं को टीडीआर के जरिये अतिरिक्त विकास की सुविधा भी मिल सकेगी। समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल के संकल्प की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रारूप पर नागरिकगण अपनी आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।
- डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश