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भोपाल के 21 साल से अटके मास्टर प्लान का रास्ता साफ, SC ने ड्राफ्ट जारी करने दी मंजूरी; अंतिम प्रकाशन पर कोर्ट की मुहर जरूरी

Published: Tue, 22 Sep 2026 07:22 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के 21 साल से लंबित नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को प्रकाशित करने की अनुमति दे ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट प्रकाशन की अनुमति दी।

  2. 21 साल बाद नए मास्टर प्लान के प्रकाशन का रास्ता खुला।

  3. सीलिंग कार्रवाई में लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल के करीब 21 साल से लंबित नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के प्रकाशन का रास्ता अब साफ हो गया है। रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग कार्रवाई से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दे दी। हालांकि, फाइनल मास्टर प्लान जारी करने से पहले इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी और कोर्ट की अनुमति के बाद ही इसका अंतिम प्रकाशन किया जा सकेगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीलिंग कार्रवाई में लापरवाही और आदेशों के प्रभावी पालन नहीं होने की शिकायतों पर नाराजगी जताई। अदालत के समक्ष ऐसी शिकायतें भी रखी गईं कि कुछ प्रतिष्ठानों को सुबह सील किया जाता है और शाम तक वे दोबारा खुल जाते हैं। सुनवाई से पहले रहवासियों की ओर से ऐसी नौ शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं। इसके बाद कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को सीलिंग कार्रवाई को प्रभावी ढंग से जारी रखने के निर्देश दिए। मामले में अब नई कमेटी गठित नहीं की जाएगी।

2005 के मास्टर प्लान से चल रहा शहर

भोपाल में फिलहाल वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर विकास गतिविधियां संचालित हो रही हैं। करीब दो दशक से नए मास्टर प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। ऐसे में नए ड्राफ्ट के प्रकाशन की अनुमति को राजधानी के शहरी विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने कार्रवाई शुरू की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शहर में करीब 62,500 प्रतिष्ठान जांच के दायरे में आए हैं और 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद करीब 190 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

फाइनल मास्टर प्लान पर कोर्ट की नजर

ड्राफ्ट जारी होने के बाद सरकार को इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फाइनल मास्टर प्लान प्रकाशित करने से पहले अदालत को इसकी जानकारी देना जरूरी होगा। यानी ड्राफ्ट के प्रकाशन के बाद भी अंतिम मास्टर प्लान लागू होने की प्रक्रिया कोर्ट की अनुमति से आगे बढ़ेगी।

मास्टर प्लान और सीलिंग कार्रवाई का मामला लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अदालत पहले भी भवन उपयोग, भूमि उपयोग और नियमों के उल्लंघन के मामलों में संबंधित प्राधिकरणों को कानून के मुताबिक प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दे चुकी है।

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23 नवंबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख तय की है। इस दौरान राज्य सरकार और नगर निगम को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में राजधानी के रहवासी और व्यावसायिक क्षेत्रों को लेकर क्या प्रावधान किए जाते हैं और फाइनल प्लान को कोर्ट की अनुमति कब मिलती है।