भोपाल में भोजताल कैचमेंट के 78 से ज्यादा गांवों के किसानों का विरोध, बोले- खेती की जमीन का भू-उपयोग न बदलें
भोजताल कैचमेंट क्षेत्र के 78 से अधिक गांवों के किसानों ने अपनी कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव के प्रस्ताव ...और पढ़ें

नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय के समक्ष किसानों ने किया प्रदर्शन।
HighLights
भोजताल कैचमेंट में भू-उपयोग बदलाव के खिलाफ किसानों का विरोध।
किसानों ने टीएंडसीपी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर आपत्ति दर्ज कराई।
कृषि भूमि को व्यावसायिक श्रेणी में बदलने से आजीविका पर संकट।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोजताल कैचमेंट एरिया के दायरे में आने वाले 78 से अधिक गांवों के किसानों ने अपनी कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव के प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले शुक्रवार को किसान शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित बदलाव पर आपत्ति दर्ज कराई। किसानों का कहना है कि भू-उपयोग बदलने से उनकी खेती और आजीविका पर संकट खड़ा हो सकता है।
भारतीय किसान संघ की तहसील हुजूर इकाई के नेतृत्व में दोपहर 12 बजे पहुंचे किसानों ने मांग की कि उनकी जमीन का उपयोग कृषि श्रेणी में ही बरकरार रखा जाए। तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने कहा कि कैचमेंट एरिया से जुड़े प्रावधानों का सीधा असर किसानों के जमीन संबंधी अधिकारों पर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले किसानों की वास्तविक स्थिति और उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
1995 के मास्टर प्लान में कृषि भूमि, अब बदलाव पर सवाल
किसानों के अनुसार, वर्ष 1995 के मास्टर प्लान और वर्ष 2031 के ड्राफ्ट प्लान में उनकी जमीन का भू-उपयोग कृषि दर्ज था। अब प्रस्तावित बदलाव को लेकर उन्हें आशंका है कि खेती करने में बाधाएं पैदा हो सकती हैं।
किसानों का कहना है कि कृषि ही उनकी आय का प्रमुख साधन है। यदि जमीन को दूसरी श्रेणियों में शामिल कर दिया गया, तो खेती पर निर्भर परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 के प्रस्ताव को हटाने तथा कृषि भूमि का मौजूदा उपयोग बरकरार रखने की मांग की है।
क्या है BIZ-1 और BIZ-2 को लेकर विवाद?
मास्टर प्लान में जमीन के अलग-अलग उपयोग निर्धारित करने के लिए विभिन्न श्रेणियां बनाई जाती हैं। बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 को लेकर किसानों की मुख्य चिंता यह है कि प्रस्तावित भू-उपयोग बदलाव के कारण उनकी जमीन पर खेती जारी रखने की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
किसानों का तर्क है कि जिस जमीन पर पीढ़ियों से खेती हो रही है, उसके उपयोग में बदलाव करने से पहले उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वे चाहते हैं कि उनकी कृषि भूमि को व्यावसायिक या अन्य प्रस्तावित श्रेणियों में शामिल करने के बजाय कृषि उपयोग में ही रखा जाए।
यह भी पढ़ें- कचरा वाहन से LED लाइट तक… MP के नगरीय निकायों में खरीदी पर उठे गंभीर सवाल; 1,134 करोड़ के खर्च की होगी जांच
किसानों ने एकजुट हो आवाज उठाने की अपील की
ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान संघ के पदाधिकारियों ने प्रभावित किसानों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग जमीन के कृषि उपयोग को बनाए रखने और प्रस्तावित बदलाव पर पुनर्विचार करने की है।
अब इस मामले में संबंधित विभाग के रुख पर नजर रहेगी। किसानों की मांग है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले उनकी आपत्तियों पर सुनवाई की जाए, ताकि भोजताल कैचमेंट क्षेत्र में आने वाले गांवों के कृषि आधारित परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो।
