भोपाल में रहवासियों के दरवाजे पहुंचा ‘शत्रु संपत्ति’ का नोटिस, नवाबी संपत्तियों की फाइल खुली; रियाज मंजिल की जांच से बढ़ी हलचल
शहर की नवाबी संपत्तियों से जुड़ी 'शत्रु संपत्ति' की पुरानी फाइलें खुलने से भोपाल के कोहेफिजा में वर्तमान भू-स्वामियों को ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
भोपाल में 'शत्रु संपत्ति' के नोटिस से भू-स्वामियों में हड़कंप।
रियाज मंजिल सहित नवाबी संपत्तियों की जांच शुरू हुई।
शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत कार्रवाई, दस्तावेज तलब किए गए।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। शहर की नवाबी संपत्तियों से जुड़ी ‘शत्रु संपत्ति’ की पुरानी फाइल खुलते ही अब उसकी सीधी आंच वर्तमान भू-स्वामियों और रहवासियों तक पहुंच गई है। कोहेफिजा में प्रशासन ने खसरा नंबर 42 से जुड़ी जमीन के वर्तमान संबंधित व्यक्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर मालिकाना हक, कब्जे और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। 16 सितंबर से शुरू हुई कार्रवाई में खसरा नंबर 42/10, रकबा 0.0320 हेक्टेयर से जुड़े व्यक्ति को 24 सितंबर को दस्तावेज और साक्ष्य के साथ उपस्थित होने को कहा गया है।
रियाज मंजिल को शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने का हवाला
नोटिस में शिकायतकर्ता अमिताभ अग्निहोत्री की शिकायत पर हुई जांच का हवाला देते हुए रियाज मंजिल को शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने का उल्लेख है। साथ ही संबंधित राजस्व रिकॉर्ड के कालम-12 में ‘शत्रु संपत्ति जांच’ की प्रविष्टि और शत्रु संपत्ति अधिनियम एक्ट का हवाला दिया गया है। इससे मामला सामान्य राजस्व विवाद से आगे बढ़कर शत्रु संपत्ति कानून के तहत जांच की प्रक्रिया में पहुंच गया है।
नवाब खानदान से जुड़ा है रियाज मंजिल का इतिहास
रियाज मंजिल का संबंध भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से बताया जाता है। जून 2026 में प्रशासन ने नवाब परिवार से जुड़ी संपत्तियों की जांच के लिए बैरागढ़ सहित विभिन्न एसडीएम को जिम्मेदारी दी थी। इसमें रियाज मंजिल, मेपल हाउस, नानी की हवेली समेत अन्य संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगालने की बात सामने आई थी।
बेहटा और बोरबन की जमीनों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
आफताब जहां बेगम के नाम दर्ज रही बेहटा और बोरबन की जमीनों को लेकर भी पुराने राजस्व रिकॉर्ड और बिक्री से जुड़े दावे सामने आए हैं। बेहटा की 30.55 एकड़ जमीन की 1994 में हुई बिक्री की जांच की मांग भी की गई है। इन दावों की वास्तविक स्थिति जांच और मूल दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
DM से तहसीलदार तक तय हैं जिम्मेदारियां
गृह मंत्रालय की 25 अप्रैल 2024 की अधिसूचना के बाद जिला मजिस्ट्रेट को पदेन शत्रु संपत्ति उप-अभिरक्षक, एसडीएम को सहायक अभिरक्षक और तहसीलदार को शत्रु संपत्ति निरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में कोहेफिजा में एसडीएम स्तर पर चल रही कार्रवाई सामान्य राजस्व जांच नहीं, बल्कि शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अब प्रशासन को संपत्तियों की स्थिति और संबंधित दस्तावेज स्पष्ट करने होंगे।
