भोपाल में बीयू से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम हटाने के प्रस्ताव पर बवाल, कांग्रेस-भाकपा समेत कई संगठनों ने खोला मोर्चा
भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने के प्रस्ताव पर व्यापक विरोध शुरू हो गया है। ...और पढ़ें

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (इनसेट- मौलाना बरकतउल्ला भोपाली)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) से प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम हटाकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने का प्रस्ताव सामने आते ही विरोध भड़क उठा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने राज्यपाल को पत्र लिखकर विरोध जताया है। वहीं भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) सहित कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने इसे स्वतंत्रा संग्राम की विरासत मिटाने की कोशिश बताया है। उन्होंने प्रस्ताव को सामाजिक रूप से विभाजनकारी बताते हुए रद्द करने की मांग की है।
एनएसयूआई ने किया सद्बुद्धि हवन
गुरुवार को एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर सद्बुद्धि हवन का आयोजन कर प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय प्रदेश की ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था है, जिसका नाम महान स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में रखा गया था। नाम परिवर्तन का निर्णय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और विद्यार्थियों की भावनाओं के विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षा, शोध, विद्यार्थियों की समस्याओं तथा विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं पर ध्यान देने के बजाय नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाकर वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
भाकपा ने जताया विरोध
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी-भाकपा के राज्य सचिव शैलेन्द्र शैली और सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोला है। दोनों ने इसे अनुचित बताते हुए सरकार से इसे तत्काल अस्वीकार करने की मांग की है। बता दें कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने बुधवार को इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था।
जमीअत ने बताया इतिहास का अपमान
जमीअत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना भोपाल के गौरवशाली इतिहास का अपमान है।
विधायक बोले- वाग्देवी के नाम पर नया विवि बना ले सरकार
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल को पत्र लिखा है। इसमें मसूद ने कहा कि उन्हें वाग्देवी भोजपाल नाम पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन 38 वर्ष पुरानी संस्था का नाम बदलना उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वाग्देवी भोजपाल के नाम पर विश्वविद्यालय चाहती है तो नया विश्वविद्यालय बनाया जाए। विधायक ने कार्य परिषद के प्रस्ताव में मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को कमतर आंकने पर आपत्ति जताते हुए इसे महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताया।
मंत्री बोले-हर प्रस्ताव मंजूर हो यह जरूरी नहीं
इस बीच प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने गुरुवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की। बाद में उन्होंने कहा कि कार्यपरिषद का प्रस्ताव आया है। उसका अध्ययन कर आगे निर्णय लिया जाएगा। उनका कहना है कि हर प्रस्ताव सरकार मंजूर ही कर ले, यह जरूरी नहीं है।
कौन थे मौलाना बरकतउल्ला भोपाली?
सात जुलाई 1854 को भोपाल के इतवारा क्षेत्र में जन्मे मौलाना बरकतउल्ला भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। वे कई भाषाओं के जानकार थे और ब्रिटिश शासन के मुखर विरोधी माने जाते थे। भारत की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने जापान, अमेरिका, जर्मनी और अफगानिस्तान सहित कई देशों में सक्रिय भूमिका निभाई।
साल 1915 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गठित भारत की पहली निर्वासित सरकार में उन्हें प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि राजा महेंद्र प्रताप उसके अध्यक्ष थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को सम्मान देने के लिए 1970 में स्थापित भोपाल विश्वविद्यालय का नाम वर्ष 1988 में बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय किया गया था।
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बरकतुल्ला भोपाली भारत की पहली निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री थे। देश की आजादी को बल देने और अंग्रेजों पर दबाव बनाने के लिए 1915 में यह सरकार अफगानिस्तान में गठित हुई थी। इतने महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम रखा गया था, जो कि भोपाल के ही निवासी थे। विश्वविद्यालय का नाम बदलना इतिहास को बदलने की कोशिश जैसा है। यदि हम बरकतउल्ला भोपाली को भूल जाएंगे तो किसको याद रखेंगे।
- शाहनवाज खान, अध्यक्ष, भोपाल हिस्ट्री फोरममौलाना बरकतउल्लाह भोपाली देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में से एक थे। उनके सम्मान में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम रखा गया था। तब इकबाल मैदान से तुलसी नगर तक पदयात्रा भी आयोजित की गई थी जिसमें मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह भी शामिल हुए थे। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए उनके असाधारण योगदान का प्रतीक है। विश्वविद्यालय का नाम केवल मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली नाम की वजह से बदला जा रहा है।
खालिद गनी, इतिहास के जानकार
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