विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अब डिजिटल घड़ी में दिखेगा ‘आठ पहर’ का समय, भारतीय परंपरा पर आधारित डिजाइन को मिला पेटेंट

Published: Mon, 21 Sep 2026 11:36 PM (IST)

एक नई डिजिटल दीवार घड़ी को भारतीय पारंपरिक 'आठ पहर' समय-गणना अवधारणा पर आधारित डिजाइन के लिए पेटेंट मिला है। ...और पढ़ें

डा. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा के नवाचार खास डिजिटल घड़ी (इनसेट में) को मिला पेटेंट।

डा. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा के नवाचार खास डिजिटल घड़ी (इनसेट में) को मिला पेटेंट।

HighLights

  1. प्राचीन 'आठ पहर' अवधारणा पर आधारित डिजिटल घड़ी को पेटेंट मिला।

  2. आरआईई भोपाल के शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान को तकनीक से जोड़ा।

  3. यह नवाचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। तकनीक के इस युग में घड़ी की सुइयां भले ही आधुनिक समय के अनुसार चलती हों, लेकिन अब एक नई डिजिटल दीवार घड़ी भारतीय परंपरा में समय को समझने का नया माध्यम बनने जा रही है। भारतीय समय-गणना की प्राचीन ‘आठ पहर’ अवधारणा पर आधारित इस घड़ी को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह प्रयोग भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का अनूठा प्रयास है, जिसे गणितीय और शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

तीन शोधार्थियों के नाम दर्ज हुआ डिजाइन

इस डिजिटल वाल क्लॉक का डिजाइन पेटेंट क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरआईई) भोपाल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजत कौशिक, मनीष कुशवाहा और उनके सहयोगी विवेक यादव के नाम पर है। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने आठ सितंबर को पंजीकृत डिजाइन क्रमांक 494340-001 और पेटेंट प्रमाण पत्र जारी किया है।

भारतीय समय-ज्ञान को आधुनिक रूप देने का प्रयास

दरअसल ‘आठ पहर’ भारतीय पारंपरिक समय-विभाजन की प्राचीन अवधारणा है, जिसमें दिन और रात के 24 घंटों को अलग-अलग आठ पहरों में बांटकर समय को समझा जाता है। डॉ. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा ने इस अवधारणा को आधुनिक डिजिटल घड़ी के रूप में प्रस्तुत किया है।

यह भी पढ़ें- भोपाल में रहवासियों के दरवाजे पहुंचा ‘शत्रु संपत्ति’ का नोटिस, नवाबी संपत्तियों की फाइल खुली; रियाज मंजिल की जांच से बढ़ी हलचल

भारतीय ज्ञान परंपरा और नई तकनीक का संगम

उन्होंने बताया कि इस नवाचार का उद्देश्य केवल घड़ी बनाना नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान को आधुनिक शैक्षिक और तकनीकी माध्यम से लोगों तक पहुंचाना भी है। यह घड़ी नई पीढ़ी के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए समय की गणितीय समझ विकसित करने का माध्यम बनेगी। इससे छात्र-छात्राएं पारंपरिक समय-विभाजन, गणितीय गणनाओं और आधुनिक समय-प्रणाली के बीच संबंध को आसानी से समझ सकेंगे।

डिजिटल वाल क्लॉक के डिजाइनरों ने कहा कि यह नवाचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुभवात्मक शिक्षा और नवाचार को दी गई प्राथमिकता के अनुरूप है।