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भोपाल AIIMS ने रचा इतिहास, पहले चरण के 6 एम्स में NABH की पूर्ण मान्यता पाने वाला पहला संस्थान; जानिए मरीजों को क्या फायदा

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:46 PM (IST)

एम्स भोपाल को राष्ट्रीय अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) की पूर्ण मान्यता मिल गई है, जो प्रधानमंत्री ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एम्स भोपाल को NABH की पूर्ण मान्यता मिली।

  2. पहले चरण के छह एम्स में पहले संस्थान का गौरव।

  3. मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण उपचार को मान्यता।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल को राष्ट्रीय अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) की पूर्ण मान्यता मिल गई है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के पहले चरण में स्थापित देश के छह एम्स संस्थानों में यह उपलब्धि हासिल करने वाला भोपाल एम्स पहला संस्थान बन गया है।

यह मान्यता अस्पताल की सभी विशेषज्ञताओं, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और कुल 1,457 बिस्तरों पर लागू होगी। इसकी वैधता 23 सितंबर 2030 तक रहेगी। इस उपलब्धि को अस्पताल में उपचार की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

600 से अधिक मानकों पर परखी जाती है गुणवत्ता

एनएबीएच की मान्यता के लिए अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं और व्यवस्थाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इसमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, दवाओं के प्रबंधन, उपचार प्रक्रियाओं, चिकित्सकीय प्रोटोकाल, प्रशासनिक व्यवस्था और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की गई।

यह प्रक्रिया जुलाई 2025 में पंजीकरण के साथ शुरू हुई थी। इसके बाद पांच वरिष्ठ मूल्यांकनकर्ताओं की टीम ने एम्स भोपाल का भौतिक निरीक्षण किया। टीम ने अस्पताल के बुनियादी ढांचे से लेकर विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली तक का आकलन किया। चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा कर निर्धारित मानकों के अनुपालन की समीक्षा की गई।

मूल्यांकन के बाद तैयार रिपोर्ट NABH बोर्ड को सौंपी गई। निर्धारित मानकों पर संस्थान के प्रदर्शन के आधार पर पूर्ण मान्यता प्रदान की गई।

मरीजों को क्या फायदा?

एनएबीएच की मान्यता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अस्पताल की सेवाओं में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का मानकीकरण है। इसके तहत उपचार प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने, संक्रमण के जोखिम को नियंत्रित करने, दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल और मरीजों की देखभाल से जुड़े प्रोटोकाल को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है।

आम मरीजों के लिए इसका मतलब है कि एम्स भोपाल की व्यवस्थाओं का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित गुणवत्ता मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया है। हालांकि, यह मान्यता अपने आप में बेहतर इलाज की गारंटी नहीं है, बल्कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुपालन का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

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निदेशक ने टीम भावना को दिया श्रेय

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल ने इस उपलब्धि पर संस्थान के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पूर्ण मान्यता मिलना पूरे एम्स परिवार के समर्पण, मेहनत और टीम भावना का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि मान्यता की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विभागों ने अपनी कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं की समीक्षा की तथा उन्हें अधिक मजबूत और मानकीकृत बनाया। इससे संस्थान में गुणवत्ता, जवाबदेही और निरंतर सुधार की संस्कृति को बढ़ावा मिला है।

गौरतलब है कि एनएबीएच, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय संस्था है। यह अस्पतालों की सेवाओं, उपचार की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से संबंधित 600 से अधिक मानकों के आधार पर मूल्यांकन करती है। एम्स भोपाल को मिली यह मान्यता संस्थान की गुणवत्ता व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित करने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि है।