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'गुरु' हों तो ऐसे! कलेक्टर को झुकना पड़ा, एक दिन बाद ही रद्द किया टीचर का ट्रांसफर; गांववालों ने दूल्हे की तरह किया स्वागत

आगर मालवा जिले में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य ने बच्चों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं कराने के लिए गांव के सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही तो कलेक्टर ने उनका 80 किमी दूर स्कूल में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने प्राचार्य के ट्रांसफर आदेश का विरोध किया। जिसके बाद उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया गया।

By Jagran News Edited By: Siddharth Chaurasiya Thu, 11 Jul 2024 03:38 PM (IST)
आगर मालवा जिले में पीएम श्री स्कूल में प्राचार्य केसी मालवीय का कलेक्टर ने ट्रांसफर कर दिया था।

जागरण न्यूज नेटवर्क, आगर मालवा। आगर मालवा जिले के एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य का कलेक्टर ने सोमवार को तबादला कर दिया। अगले दिन मंगलवार को तबादला आदेश निरस्त कर दिया। इस घटना के बाद प्राचार्य बुधवार को जब गांव पहुंचे तो लोगों ने उनका जोदार स्वागत किया

यह मामला जिले के ग्राम पालखेड़ी का है। यहां स्थित शासकीय पीएम श्री स्कूल में प्राचार्य केसी मालवीय का कलेक्टर ने ट्रांसफर कर दिया था। लेकिन अगले ही दिन कलेक्टर को झुकना पड़ा और उनके ट्रांसफर को निरस्त भी करना पड़ा।

ट्रांसफर रद्द होने से ग्रामीणों में खुशी की लहर

इसके बाद जब प्राचार्य केसी मालवीय स्कूल पहुंचे तो ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में उनका स्वागत किया और घोड़ी पर बैठाकर जुलूस निकाला। प्राचार्य का स्वागत करते हुए और उन्हें घोड़ी पर बैठाकर जुलूस निकालने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

एक और वीडियो में प्राचार्य छात्रों को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों से बाहर जाकर एक रजिस्टर्ड ऑफिसर का कलेक्टर ने ट्रांसफर किया है। बच्चों से वो भी यही कह रहे हैं कि क्या आप एक ऐसा अधिकारी बनना चाहेंगे जो दबाव में काम करें।

80 किमी दूर दूसरे स्कूल में किया था ट्रांसफर

इससे पहले, प्राचार्य केसी मालवीय का करीब एक सप्ताह पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें वह स्कूल के बच्चों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं होने को लेकर गांव के सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कहते हुए दिखाई दे रहे थे।

इस मामले पर राजनीतिक रंग भी चढ़ा और इसके बाद प्राचार्य का कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा 80 किमी दूर स्कूल में ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद जब ट्रांसफर निरस्त हुआ तो प्राचार्य ने कलेक्टर की योग्यता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राचार्य का ट्रांसफर निरस्त होने से ग्रामीण और स्कूल के विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।