ग्वालियर, जेएनएन। ग्वालियर के लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिली है। मौसम में सुधार हुआ तो लोगों ने घरों से बाहर निकलना शुरू कर दिया। इधर, शादियों के साये शुरू होने की वजह से लोगों के बीच नजदीकियां बढ़ गई है। तीसरी लहर में जहां सर्दी, जुकाम, बुखार के लक्षणों ने जहां एक तरफ राहत दी, वहीं दूसरी तरफ लोगों को लापरवाह बना दिया। जिसका असर आने वाले समय में देखा जा सकता है। गणितज्ञ और डाक्टर डर रहे हैं कि तीसरी लहर पहली लहर जितनी लंबी हो सकती है। एमआईटीएस कॉलेज के गणितज्ञ डॉ आरएस जादौन का कहना है कि तीसरी लहर अपने चरम पर है, शहर में मामले कम होने लगे हैं और 30 जनवरी तक पूरे देश में पीक आ चुकी होगी। लेकिन इस बार पहली लहर की तरह लंबे समय तक केस मिलते रहेंगे। क्योंकि कोविड के नियमों का पालन नहीं करना बच्चे, जवान और बूढ़े सभी को परेशानी में डालने वाला है इसलिए सावधान रहें और कोविड से बचें।

पहली लहर 11 महीने तक चली

कोरोना की पहली लहर 11 महीने चली। मार्च 2020 से कोरोना के मामले शुरू होने लगे और सितंबर 2020 में कोरोना अपने चरम पर पहुंच गया। लेकिन इसके बाद भी जनवरी तक कोरोना के मामले मिलते रहे और 8 फरवरी को पहली लहर के खत्म होने की घोषणा की गई। जबकि दूसरी लहर में मार्च 2021 में मामले मिलने लगे और फरवरी में कोरोना अपने चरम पर पहुंच गया था और मई के अंत में मामले लगभग बंद हो गए थे। डाक्‍टर ऋतिक शर्मा का कहना है कि दूसरी लहर में जिस तेजी से केस मिलने लगे, उससे कोरोना भी दूर हो गया। लेकिनअगर तीसरी लहर में केस मिलने की रफ्तार धीमी है तो इस बार भी पहली लहर की तरह तीसरी लहर भी लंबे समय तक चल सकती है।

शादी समारोह में नहीं हो रहा कोविड नियमों का पालन

शादियों के साये आ गए हैं, शादियां हो रही हैं। जिसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी भाग ले रहे हैं। भले ही सरकारी प्रशासन ने लोगों की संख्या तय कर दी हो, लेकिन शादी समारोहों में भीड़ जुट रही है। जिनके चेहरे पर न तो मास्क है और न ही शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा है। शादी समारोह में लापरवाही नजर आ रही है।

बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई

खराब मौसम की वजह से लोग घरों में कैद थे और बाहर उनका आना-जाना कम था। लेकिन मौसम में सुधार हुआ है और शादियों के शुरू होने से से बाजारों में चहल-पहल काफी बढ़ गई है। बाजार में दुकानदार से लेकर ग्राहकों तक न तो कोविड के नियमों का पालन किया जा रहा है और न ही करवाया जा रहा है।

परेशानी में डाल सकता ओमिक्रोन का बीए.2 और बीए.3 वायरस

गणितज्ञ डा आरएस जादौन का कहना है कि वायरस के उत्परिवर्तन के कारण ओमिक्रोन में थोड़ा बदलाव आया था और कुछ ऐसे मामले पाए गए हैं कि ओमिक्रोन बीए 2, बीए 3 का वायरस फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर रहा है। हालांकि, ग्वालियर में किस तरह का वायरस लोगों को बीमार कर रहा है, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, बीए.1 के अधिक घातक होने की सूचना नहीं है।

Edited By: Babita Kashyap