भोपाल, हरिचरण यादव। भोपाल का वन विहार नेशनल पार्क लोगों को जागरुक कर सांपों को बचाने में जुटा है। इसके लिए पार्क प्रबंधन ने पार्क पहुंचने वाले पर्यटकों को सांपों से रूबरू कराना शुरू कर दिया है। प्रत्येक शनिवार और रविवार को सांपों के बारे में पर्यटकों को जानकारी दी जा रही है।

बताया जा रहा है कि सांप प्रकृति और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है जोे खाद्य श्रृंखला को बनाए रखता है। पार्क में कोबरा, रैसल वाइपर, अजगर, क्रैट, सेंडबोआ, अर्थबोआ जैसी प्रजाति के सांप है।

सर्प विशेषज्ञों का मानना है कि सांपों को लेकर आज भी कई लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियां हैं जिसे दूर किया जाना जरूरी है। हर साल जुलाई से लेकर दिसंबर तक भोपाल शहर में 300 से अधिक सांप निकलते हैं। इनमें से कुछ को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाता है। जख्मी सांपों को वन विहार में रखा जा रहा है। 

सर्प व्याख्यान केंद्र में यह दी जा रही जानकारी-

सांपों को बचाना इसलिए जरूरी

- पारिस्थितिकीय तंत्र की खाद्य श्रृंखला में सांप महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कोबरा, रैट स्‍नेक जैसे सांप चूहे खाते हैं। यही चूहे अनाज का एक बड़ा हिस्सा चट कर जाते हैं। यदि सांप नहीं होंगे तो चूहों की आबादी बढ़ती जाएगी, जो खतरनाक होगी।

- चूहों की अधिकता से प्लेग जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है।

सांपों से ऐसे करें बचाव

- घर के आसपास की जगह को साफ रखें। बोरे व बैग को ऊंचाई पर रखें।

- जमीन पर सोते समय अनिवार्य रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें।

- जमीन पर रखे बिस्तर, कपड़े, जूते की पहले जांच कर लें।

- सांप दिखने पर शांत रहे, शोरगुल न करें। सांप पकड़ने वाले विशेषज्ञ की मदद लें। सांप को मारने का विचार न करें।

- शाम से लेकर रात तक झाड़ियों व घने जंगल में जाने से बचें। जरूरी होने पर टार्च का उपयोग करें। जूतों का उपयोग करें।

सांप कांटने पर यह करें

- जिस हिस्से में सर्प ने काटा है, उस पर मालिश न करें। प्रभावित जगह को साबुन व साफ पानी से धो लें।

- तुरंत नजदीक के अस्पताल में दिखाएं। जहर रोधी दवाईयां लें।

Edited By: Priti Jha