यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 21, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आय से अधिक संपत्ति मामले में मुलायम और अखिलेश को बड़ी राहत, सीबीआई ने दी क्लीन चिट
सीबीआइ ने कहा है कि जांच में दोनों नेताओं के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए और अगस्त 2013 में दोनों के खिलाफ प्रारंभिक जांच बंद कर दी गई थी।

नई दिल्ली [माला दीक्षित]। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को बड़ी राहत मिली है। सीबीआइ ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोनों नेताओं को क्लीन चिट दी है। सीबीआइ ने कहा है कि जांच में दोनों नेताओं के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए और अगस्त 2013 में दोनों के खिलाफ प्रारंभिक जांच बंद कर दी गई थी। सीबीआइ ने यह बात सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल अपने ताजा हलफनामे में कही है। कोर्ट इस मामले में जुलाई में सुनवाई करेगा।
कांग्रेस नेता और वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में जांच की स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में या मजिस्ट्रेट के समक्ष दाखिल किए जाने की मांग की है। इसी अर्जी पर कोर्ट ने सीबीआइ को जवाब दाखिल करने को कहा था।
सीबीआइ ने हलफनामे में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के एक मार्च 2007 के आदेश के बाद मुलायम सिंह व उनके दोनों पुत्रों अखिलेश, प्रतीक और पुत्रवधू डिंपल यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्रारंभिक जांच के लिए पांच मार्च 2007 को पीई दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने मुलायम व अखिलेश यादव आदि की पुनर्विचार याचिका का निपटारा करते हुए 13 दिसंबर 2012 को डिंपल यादव के खिलाफ जांच बंद करने का आदेश दिया था। बाकी लोगों के खिलाफ जांच कर कानून के मुताबिक सीबीआइ को स्वयं ही आगे का फैसला लेने को कहा था।
सीबीआइ ने कहा है कि इस आदेश के बाद मुलायम, अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ जांच की लेकिन आरोप के मुताबिक, कुछ भी नहीं पाया गया। सात अगस्त 2013 को सीबीआइ ने तीनों के खिलाफ प्रारंभिक जांच बंद कर दी। सीबीआइ ने कहा है कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का कोई सबूत नहीं मिलने के कारण विधिवत एफआइआर नहीं दर्ज की गई। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जांच के बाद मुलायम, अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ पीई बंद करने का फैसला लिया था। कोर्ट के आदेश को देखते हुए जांच रिपोर्ट न तो सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की और न ही मजिस्ट्रेट की अदालत में दी। उसकी प्रति याचिकाकर्ता को भी नहीं दी गई।
एजेंसी ने कहा है कि पीई आरोपों की सत्यता जानने के लिए दर्ज की गई थी। कोर्ट ने कभी भी सीबीआइ को आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश नहीं दिया था। सीबीआइ ने मामले से संबंधित पूरा ब्योरा और सीबीआइ मैनुअल में जांच के बारे में दी गई व्यवस्था का विस्तृत विवरण दिया है। जांच एजेंसी ने कहा है कि मामला बंद करने की जानकारी आठ अक्टूबर 2013 को सीवीसी को दी गई थी और मामले से जुड़े कारण भी बताए थे।
विश्वनाथ चतुर्वेदी ने 2005 में याचिका दाखिल कर मुलायम सिंह व उनके परिवार पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। 2012 में पुनर्विचार याचिका पर फैसला आने के बाद मामले में क्या हुआ यह पता न चलने पर अभी हाल में चतुर्वेदी ने नई अर्जी दाखिल कर कोर्ट से सीबीआइ को जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश देने के मांग की है।