जलसंरक्षण के अग्रदूत ने सात बीघा जमीन में खोदवा दिया तालाब

फोटो- 1सी जागरण संवाददाता जमानियां (गाजीपुर) जल के बिना जीवन की कल्पना भी बेमानी है। इस

By JagranEdited By: Publish:Sun, 27 Sep 2020 05:39 PM (IST) Updated:Sun, 27 Sep 2020 05:39 PM (IST)
जलसंरक्षण के अग्रदूत ने सात बीघा जमीन में खोदवा दिया तालाब
जलसंरक्षण के अग्रदूत ने सात बीघा जमीन में खोदवा दिया तालाब

फोटो- 1सी जागरण संवाददाता, जमानियां (गाजीपुर) : जल के बिना जीवन की कल्पना भी बेमानी है। इसके महत्व को बखूबी समझा है स्टेशन बाजार निवासी मजीबुरहमान ने। ब्लॉक के सराय मुराद अली गांव स्थित अपनी सात बीघा जमीन में पोखरा खोदवाकर क्षेत्र में जलसंरक्षण के अग्रदूत बन गए है। इनके इस कार्य से प्रकृति का तो भला हो ही रहा है, साथ ही यह पोखरा अब कमाई का भी बेहतर जरिया बना हुआ है। यहीं नहीं इन्होंने तालाब के भीटे पर चारों तरफ फलदार और छायादार पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया है। मजीबुरहमान जलसंरक्षण की दिशा में वर्ष 1992 से ही कार्य कर रहे है। कहा कि बढ़ते जल संकट के बीच उत्पन्न होने वाले भारी खतरे से निपटने के लिए हम अभी से सचेत नहीं हुए, पानी की बचत व संरक्षण हेतु ठोस व्यवस्था नहीं की गई तो आगे चलकर उसका खामियाजा हमें ही भोगना पड़ेगा। बताया कि जल को लेकर भविष्य में आने वाली तमाम समस्याओं को देखते हुए हमने अपनी सात बीघा जमीन में पोखरा खोदवाकर जलसंरक्षण की दिशा में कार्य शुरू कर दिए। 27 वर्षो पूर्व शुरू किया गया यह कार्य वर्तमान समय गिरते भूगर्भ जलस्तर को बचाने में काफी सहायक साबित हो रहा है। जलसंरक्षण को लेकर खोदवाए गए पोखरे में मछली पालन कर हर वर्ष चार से पांच लाख रुपये की आमदनी भी हो जाती है। --------------- आने वाली पीढ़ी को मिलेगा जलसंरक्षण का फायदा जलसंरक्षण की दिशा में 1992 से शुरू किया गया मजीबुरहमान का यह कार्य आने वाली पीढ़ी के लिए फायेदमंद साबित होगा। गांव का जलस्तर आसपास के गांवों की अपेक्षा बेहतर है। उनका कहना है कि सभी को अपने घर खेत के अगल बगल जल का संरक्षण करना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले कुछ वर्षों में स्थिति और भयावह हो जायेगी । --- परिवार का मिला भरपूर सहयोग मजीबुरहमान ने बताया कि जलसंरक्षण को लेकर जब वर्ष 1992 में सात बीघा की जमीन को खोदवाकर पोखरा बनाने का कार्य शुरू कराया तो परिवार के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई लेकिन जलसंरक्षण को लेकर मेरे अंदर उपजे जुनून ने इस कार्य को अंजाम तक पहुंचा दिया। जब पोखरा में मछली पालन के कार्य से आमदनी होने लगी तो परिवार के लोगों ने भी मेरे इस निर्णय को सराहा और कहा कि जलसंरक्षण की दिशा में किया गया यह कार्य जल के महत्व को बताता है।

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