चहलारीघाट पुल से बदलेगी गांजर की सियासी तस्वीर

बहराइच : दस साल में घाघरा नदी के चहलारीघाट पर बनकर तैयार हुआ पुल गांजर के सियासी तस्वीर को भी बदलेगा

By Edited By: Publish:Thu, 09 Feb 2017 12:45 AM (IST) Updated:Thu, 09 Feb 2017 12:45 AM (IST)
चहलारीघाट पुल से बदलेगी गांजर की सियासी तस्वीर
चहलारीघाट पुल से बदलेगी गांजर की सियासी तस्वीर

बहराइच : दस साल में घाघरा नदी के चहलारीघाट पर बनकर तैयार हुआ पुल गांजर के सियासी तस्वीर को भी बदलेगा। बहराइच जिले का महसी और सीतापुर का रेउसा ब्लॉक इसकी सीमा से सीधा जुड़ा है। अभी तक यह क्षेत्र विकास से दूर है। यही कारण है कि नदी के आसपास के इलाके को लोग गांजर का क्षेत्र कहते हैं। नदी के चलते दोनों क्षेत्रों की कड़ियां टूटी हुई थी। इसके चलते यहां कुटीर व बड़े उद्योग पनप नहीं पाए।

जिले में घाघरा नदी पर बनने वाला यह तीसरा पुल है। इससे पूर्व जालिम नगर और घाघराघाट पर संजय सेतु बन चुका है। पुल बनने से लखीमपुर और बाराबंकी होते हुए लखनऊ का सफर आसान हो गया है। चहलारीघाट पुल की मांग लंबे अरसे से चल रही थी। जनवरी 2007 में इस पुल का निर्माण शुरू हुआ था। हिमाचल प्रदेश की टीआरजी कंपनी ने 847 मीटर पुल का निर्माण शुरू किया। इस पुल का निर्माण होने के बाद घाघरा नदी ने अपना बहाव क्षेत्र बदल दिया। बाद में आईआईटी के इंजीनियरों ने चहलारीघाट का भ्रमण कर दूसरा पुल बनाए जाने की संस्तुति की। तकरीबन सवा दो किमी. लंबा पुल का निर्माण उप्र राज्य सेतु निगम ने शुरू कराया। पुल बनने से बहराइच से सीतापुर की दूरी सिमट कर 96 किमी. के आसपास पहुंच गई है। देश की राजधानी नई दिल्ली का सफर अब जिले से सीधे जुड़ गया है। घाघरा नदी के फैलाव से बाढ़ के समय में कटान की समस्या और तेज हो जाती है। इस क्षेत्र की यह बड़ी समस्या है। आवागमन के लिए पुल न होने के चलते गांजर के आसपास गन्ने की खेती तो खूब हुई,लेकिन इसका सही दाम किसानों को हासिल हो, इसके लिए किसी सरकार ने चीनी मिल लगाने की नहीं सोची। जनप्रतिनिधि भी पुल न होने से इस क्षेत्र के विकास के लिए कम फिक्रमंद रहे। पुल पर आवागमन शुरू होने के साथ ही इस क्षेत्र के विकास को लेकर भी लोगों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बहराइच विकास मंच अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने बताया कि बेशक इस पुल से क्षेत्र का विकास होगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि अब इस क्षेत्र में बड़े कल कारखाने स्थापित कराएं। कुटीर उद्योगों को सींचें जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिले और लोगों को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में विकास की किरण पड़ते ही सियासी तस्वीर भी नए सिरे की उभरेगी।

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