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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 12, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यहां भगवान शिव ने ध्‍यान भंग होते ही जला कर भस्‍म कर दिया था कामदेव को

By abhishek.tiwariEdited By:
Published: Wed, 12 Jul 2017 12:16 PM (IST)Updated: Thu, 13 Jul 2017 02:07 PM (IST)

भगवान शिव के क्रोध से सभी वाकिफ हैं। एक बार ध्‍यान भंग होने उन्‍होंने कामदेव को जला दिया था। आइए जानें कहां है वो जगह....

यहां भगवान शिव ने ध्‍यान भंग होते ही जला कर भस्‍म कर दिया था कामदेव को
यहां भगवान शिव ने ध्‍यान भंग होते ही जला कर भस्‍म कर दिया था कामदेव को

कामेश्‍वर धाम है वो जगह

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में कामेश्वर धाम का मंदिर है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां पर भगवान शिव ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्‍म कर दिया था। इस भूमि पर महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण आए थे। ऋषि दुर्वासा ने यहां तप किया था। दूर-दूर से भक्‍त इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। 

 

क्‍या है कथा

भगवान शिव द्वारा कामदेव को भस्म करने कि कथा (कहानी) शिव पुराण मे इस प्रकार है। भगवान शिव कि पत्नी सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ मे अपने पति भोलेनाथ का अपमान सहन नही कर पाती है और यज्ञ वेदी मे कूदकर आत्मदाह कर लेती है। जब यह बात शिवजी को पता चलती है तो वो अपने तांडव से पूरी सृष्टि मे हाहाकार मचा देते है। इससे व्याकुल सारे देवता भगवान शंकर को समझाने पहुंचते है। महादेव उनके समझाने से शान्त होकर, परम शान्ति के लिए, गंगा तमसा के इस पवित्र संगम पर आकर समाधि मे लिन हो जाते है।

 

शिव जी हो जाते हैं समाधि में लीन

इसी बीच महाबली राक्षस तारकासुर अपने तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लेता है जिससे की उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र द्वारा ही हो सकती थी। यह एक तरह से अमरता का वरदान था क्योकि सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव समाधि मे लीन हो चुके थे। इसी कारण तारकासुर का उत्पात दिनो दिन बढ़ता जाता है और वो स्वर्ग पर अधिकार करने कि चेष्टा करने लगता है। यह बात जब देवताओं को पता चलती है तो वो सब चिंतित हो जाते है और भगवान शिव को समाधि से जगाने का निश्चय करते है। इसके लिए वो कामदेव को सेनापति बनाकर यह काम कामदेव को सोपते है। कामदेव, महादेव के समाधि स्थल पहुंचकर अनेकों प्रयत्नो के द्वारा महादेव को जगाने का प्रयास करते है, जिसमे अप्सराओ के नृत्य इत्यादि शामिल होते है, पर सब प्रयास बेकार जाते है।

 

त्रिनेत्र से कर देते हैं कामदेव को भस्‍म

अंत में कामदेव स्वयं भोले नाथ को जगाने लिए खुद को आम के पेड़ के पत्तो के पीछे छुपाकर शिवजी पर पुष्प बाण चलाते है। पुष्प बाण सीधे भगवान शिव के हृदय मे लगता है, और उनकी समाधि टूट जाती है। अपनी समाधि टूट जाने से भगवान शिव बहुत क्रोधित होते है और आम के पेड़ के पत्तो के पिछे खडे कामदेव को अपने त्रिनेत्र से जला कर भस्म कर देते है।

 

कई संतो कि तपोभूमि रहा है कामेश्वर धाम -

त्रेतायुग में इस स्थान पर महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम लक्ष्मण आये थे जिसका उल्लेख बाल्मीकीय रामायण में भी है। अघोर पंथ के प्रतिष्ठापक श्री कीनाराम बाबा की प्रथम दीक्षा यहीं पर हुई थी। यहां पर दुर्वासा ऋषि ने भी तप किया था। बताते हैं कि इस स्थान का नाम पूर्व में कामकारू कामशिला था। यही कामकारू पहले अपभ्रंश में काम शब्द खोकर कारूं फिर कारून और अब कारों के नाम से जाना जाता है।

 

कामेश्वर धाम कारो मे तीन प्राचीन शिवलिंग व शिवालय स्थापीत है।

 

श्री कामेश्वर नाथ शिवालय-

यह शिवालय रानी पोखरा के पूर्व तट पर विशाल आम के वृक्ष (पेड़) के नीचे स्थित है। इसमें स्थापित शिवलिंग खुदाई में मिला था जो कि ऊपर से थोड़ा सा खंडित है।

 

श्री कवलेश्वर नाथ शिवालय-

इस शिवालय कि स्थापना अयोध्या के राजा कमलेश्वर ने कि थी। कहते है की यहां आकर उनका कुष्ट का रोग सही हो गया था इस शिवालय के पास मे हि उन्होने विशाल तालाब बनवाया जिसे रानी पोखरा कहते है।

 

श्री बालेश्वर नाथ शिवालय-

बालेश्वर नाथ शिवलिंग के बारे मे कहा जाता है कि यह एक चमत्कारिक शिवलिंग है। किवदंती है की जब 1728 में अवध के नवाब मुहम्मद शाह ने कामेश्वर धाम पर हमला किया था तब बालेश्वर नाथ शिवलिंग से निकले काले भौरो ने जवाबी हमला कर उन्हे भागने पर मजबूर कर दिया था।

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