आरटीआइ का जवाब न देने पर थाना प्रभारी को सात हजार रुपये हर्जाना,ड्राफ्ट देने आए टीम को आम का एक पौधा उपहार स्वरूप दिया

आरटीआइ के तहत मांगी गई जानकारी का जवाब समय पर न देने पर राज्य सूचना आयुक्त के आदेश पर थाना सुधार के प्रभारी को अपने खाते से सात हजार रुपये का हर्जाना चुकाना पड़ा।

By JagranEdited By: Publish:Fri, 19 Aug 2022 01:24 AM (IST) Updated:Fri, 19 Aug 2022 01:24 AM (IST)
आरटीआइ का जवाब न देने पर थाना प्रभारी को सात हजार रुपये हर्जाना,ड्राफ्ट देने आए टीम को आम का एक पौधा उपहार स्वरूप दिया
आरटीआइ का जवाब न देने पर थाना प्रभारी को सात हजार रुपये हर्जाना,ड्राफ्ट देने आए टीम को आम का एक पौधा उपहार स्वरूप दिया

राजन कैंथ, लुधियाना : आरटीआइ के तहत मांगी गई जानकारी का जवाब समय पर न देने पर राज्य सूचना आयुक्त के आदेश पर थाना सुधार के प्रभारी को अपने खाते से सात हजार रुपये का हर्जाना चुकाना पड़ा। पुलिस महकमा ने शिकायतकर्ता को हर्जाना का ड्राफ्ट व सूचनाएं तीन दिन पहले उपलब्ध करवा दी।

दरअसल, मुलांपुर निवासी जगशीर सिंह ने 22 मार्च 2021 में थाना सुधार, जिला जगराओं से आरटीआइ के तहत महीनावार क्राइम रिपोर्ट मांगी थी। उसके अलावा पूछा गया था कि 2010 से लेकर आज तक उन केसों की जानकारी दी जाए, जिनमें पुलिस द्वारा अदालत में चालान पेश करने से देरी होने के कारण दोषियों को धारा 167/2 के तहत आसानी से जमानत कराने का लाभ मिला हो। इस पर पुलिस की ओर से 26 मार्च 2021 में जवाब दिया गया कि ऐसी सूचना लेने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी से लिखवा कर लाया जाए। वह यह जानकारी नहीं दे सकते।

10 मई 2021 को जगसीर सिंह ने आइजी लुधियाना के पास इस संबंधी अपील लगाई। इस पर आइजी ने मांगी गई जानकारी सात दिनों के अंदर देने के लिए कहा। इसके बावजूद वहां से कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद 22 जुलाई 2021 में जगसीर सिंह सूचना कमिश्नर पंजाब (चंडीगढ़) के पास चला गया और थाना सुधार पुलिस के खिलाफ सूचना न देने की शिकायत दर्ज कराई। कमिश्नर द्वारा तलब किए जाने पर 16 अक्टूबर 2021 पुलिस ने कहा कि सूचना का मैटर ज्यादा है, उसे इकट्ठा करना मुश्किल है। मामले में कड़ा नोटिस लेते हुए कमिश्नर ने पांच जनवरी 2022 में एसएसपी जगराओं को निर्देश जारी किए कि जवाब देने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को भेजा जाए। मगर उसका कोई जवाब नहीं मिलने पर 20 अप्रैल 2022 पुलिस को कारण बताओ नोटिस देकर तलब कर लिया। जब उधर से कोई पेश न हुआ तो कमिश्नर ने जानकारी के साथ-साथ पांच हजार रुपये हर्जाना अदा करने के निर्देश जारी किए। फिर भी कोई पेश नहीं हुआ तो 11 जुलाई 22 को राज्य सूचना आयुक्त अमृत प्रताप सिंह सेखों ने हर्जाना की रकम बढ़ा कर 7 हजार रुपये कर दिया। साथ ही डीजीपी, आईजी तथा एसएसपी को सख्त निर्देश जारी करते हुए आरोपित पुलिस अफसर के खिलाफ एक्शन लेने और ड्राफ्ट बना जगसीर सिंह को अदा करने के आर्डर जारी किए। एसएसपी से अगली पेशी पर पेश होने के लिए कहा। ऐसा न करने पर हर्जाना की रकम लगातार बढ़ाई जाती रहेगी। जिस पर 15 अगस्त को जगसीर सिंह के घर आए एएसआइ गुरचरण सिंह ने न केवल मांगी गई जानकारी मुहैया कराई, बल्कि 7 हजार रुपये का ड्राफ्ट भी दिया। बदले में जगसीर सिंह ने पुलिस की टीम को आम का एक पौधा उपहार स्वरूप दिया।

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