GMCH-32 के आइसीयू का हाल जनरल वार्ड से भी बदतर, मरीज परेशान Chandigarh News

मरीज के परिजन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से अनुरोध कर थक चुके थे लेकिन आइसीयू की बंद पड़ी एसी को ठीक करवाने के लिए दो दिन बाद भी कोई व्यवस्था नहीं हुई।

By Vikas KumarEdited By: Publish:Wed, 09 Oct 2019 01:41 PM (IST) Updated:Wed, 09 Oct 2019 05:07 PM (IST)
GMCH-32 के आइसीयू का हाल जनरल वार्ड से भी बदतर, मरीज परेशान Chandigarh News
GMCH-32 के आइसीयू का हाल जनरल वार्ड से भी बदतर, मरीज परेशान Chandigarh News

जेएनएन, चंडीगढ़। सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की आइसीयू की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां भर्ती एक मरीज के बेड पर पैर के पास वॉल हैंगिंग फैन चल रहा था। मरीज दर्द से कराह रहा था, पंखे के कारण बेड पर उसके करवट बदलने तक की जगह नहीं थी। मरीज के परिजन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से अनुरोध करके थक चुके थे, लेकिन आइसीयू की बंद पड़ी एसी को ठीक करवाने के लिए दो दिन बाद भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई थी।

वहीं आइसीयू में ही भर्ती एक अन्य मरीज के परिजन उससे मिलने आए तो उन्हें प्रोटोकॉल दरकिनार कर बिना गाउन के ही अंदर भेज दिया गया। इतना ही नहीं आइसीयू के अंदर न तो हैंडवॉश करने की व्यवस्था है, न हीं कोई वेटिंग एरिया। ऐसे में वहां जनरल वार्ड की तरह दिनभर लोगों की भीड़ लगी रहती है।

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती गंभीर मरीजों की सेहत के साथ किस कदर खिलवाड़ हो रहा हे इसे आइसीयू में साफ देखा जा सकता है। मानकों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से वहां अपना नियम-कानून चलाया जा रहा हैं। आलम यह है कि शिकायत करने वाले परिजन को बाहर करने की धमकी तक दे दी जा रही है। ऐसे में परिजन अपने मरीज का इलाज कराने के लिए मुंह बंद कर सबकुछ देखने को मजबूर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले पर न तो जीएमसीएच के डायरेक्टर ¨प्रसिपल कुछ कहने को तैयार हैं न हीं मेडिकल सुपरिंटेंडेंट।

फ्यूमिगेशन कभी होती ही नहीं

आइसीयू प्रोटोकॉल के अनुसार वहां हफ्ते में एक बार फ्यूमिगेशन यानि यूनिट को संक्रमण मुक्त करने की प्रक्रिया होनी चाहिए। लेकिन आइसीयू के कर्मचारियों के अनुसार ऐसा कभी होता ही नहीं। यूनिट तो छोड़िए वेंटीलेटर की ट्यूब तक को एस्टरलाइज करने की व्यवस्था नहीं है। एक मरीज के जाने के बाद उसे दूसरे मरीज को लगाने के लिए उनके परिजनों से बाहर भेजकर उसे एस्टरलाइज कराना पड़ता है। चार बेड की जगह में नौ बेड का आइसीयू बनाया गया है। जिससे इंचार्ज का रूम, हैंडवॉश एरिया, वेटिंग एरिया जैसे महत्वपूर्ण पार्ट नहीं है। ऐसे में क्रास इंफेक्शन के खतरे के बीच ओवर क्राउडेड एरिया में गंभीर मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है।

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