भाजपा की पहचान बने मुद्दों पर कमलनाथ सरकार का मास्टर स्ट्रोक

गोशाला अकेला मुद्दा नहीं है। ऐसे और भी कई मामले हैं, जहां कांग्रेस सरकार भाजपा के पर्याय बने मुद्दों पर उसे चित करते नजर आती है।

By Manish NegiEdited By: Publish:Wed, 30 Jan 2019 09:34 PM (IST) Updated:Wed, 30 Jan 2019 09:34 PM (IST)
भाजपा की पहचान बने मुद्दों पर कमलनाथ सरकार का मास्टर स्ट्रोक
भाजपा की पहचान बने मुद्दों पर कमलनाथ सरकार का मास्टर स्ट्रोक

ऋषि पाण्डे, भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाजपा पर बुधवार को कसे गए इस तंज पर गौर कीजिए। 'मुझे बड़ा दुख होता है कि जो लोग खुद को गोरक्षक कहते थे, उन्होंने 15 सालों में एक भी गोशाला का निर्माण नहीं किया।' इस तंज में दम भी है और उन्हें इसका हक भी, क्योंकि उनकी सरकार मंगलवार को एक हजार गोशालाओं के निर्माण को मंजूरी दे चुकी है। जहां एक लाख निराश्रित गोवंश को ठौर ठिकाना मिलेगा, जो अभी सड़कों पर भटकते रहते हैं। गोशाला अकेला मुद्दा नहीं है। ऐसे और भी कई मामले हैं, जहां कांग्रेस सरकार भाजपा के पर्याय बने मुद्दों पर उसे चित करते नजर आती है।

शुरू से धर्म-अध्यात्म भाजपा की सुविधा का विषय रहे हैं। लंबे अरसे से कांग्रेस इस मुद्दे पर बैकफुट पर खड़ी नजर आती थी, लेकिन 'वक्त है बदलाव का' के नारे के साथ ही सूरते हाल भी बदला है। अब कांग्रेस भी बढ़-चढ़कर धर्म-अध्यात्म के मुद्दों पर सक्रिय दिखती है। सरकार बनते ही जिस तरह कमलनाथ सरकार के मंत्रियों ने शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ करते हुए कुर्सी संभाली वह देखने लायक था। कमलनाथ सरकार ने आते ही पहला छक्का मारते हुए अध्यात्म के नाम पर एक पृथक महकमा ही बना डाला।

मध्य प्रदेश इकलौता ऐसा प्रदेश होगा, जहां अध्यात्म सरकारी महकमा बना। इस महकमे को नर्मदा न्यास, मंदाकिनी और क्षिप्रा नदी के न्यास के गठन, मध्य भारत गंगाजलि निधि न्यास, पवित्र नदियों को जीवित इकाई बनाने के संबंध में कार्रवाई करने, राम वन गमन पथ में पड़ने वाले अंचलों का विकास सहित धर्मस्व और आनंद विभाग के सारे काम सौंपे गए। इससे वह सारे साधु-संत कांग्रेस के ज्यादा नजदीक आ गए, जो किसी न किसी वजह से भाजपा सरकार से नाराज चल रहे थे।

सरकार लोगों की धार्मिक भावनाओं का कितना कद्र करती है, यह संदेश देने के लिए उज्जैन कमिश्नर और कलेक्टर को हटाने में जरा-भी विलंब नहीं किया गया। उनका अपराध यह था कि शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा नदी सूखने के कारण श्रद्धालुओं को कीचड़ मिले पानी से स्नान करना पड़ा था। लोगों की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ को गंभीरता से लेते हुए कमलनाथ ने मुख्य सचिव से जांच कराई और दोनों अफसरों को मंत्रालय में बैठा दिया।

ताजा मामला गोशालाओं का है। मंगलवार को कमलनाथ सरकार ने पूरे राज्य में एक हजार गोशालाओं के निर्माण का फैसला लिया है। इसमें एक लाख निराश्रित गोवंश की देखरेख की जाएगी। इसके लिए सरकार ने कुल 450 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। कमलनाथ को बैठक में जब यह बताया गया कि पूरे राज्य में एक भी सरकारी गोशाला नहीं है तो वह चकित रह गए। इसलिए उन्हें यह कहने को मजबूर होना पड़ा कि गोरक्षक होने का दंभ भरने वाले 15 साल में एक भी गोशाला नहीं बना पाए।

मंत्रियों संग मुख्यमंत्री लगाएंगे गंगा में डुबकी
अगले माह मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने कुछ मंत्रियों के साथ कुंभ (प्रयागराज) जा रहे हैं, जहां वह गंगा में डुबकी लगाएंगे। इतना ही नहीं, राम वन गमन पथ के लिए सरकार अगले कुछ दिन में बड़ी घोषणा कर सकती है।

हम प्रचार में नहीं, काम में भरोसा करते हैं
भाजपा धर्म के नाम पर ढकोसला और प्रचार करती है, जबकि हम उनसे ज्यादा धार्मिक हैं, लेकिन दिखावा नहीं करते। कुंभ मेले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जो पंडाल लगाया जा रहा है, वहां प्रदेश के कथावाचक श्रद्धालुओं को कथा सुनाएंगे। प्रदेश के शास्त्रीय कलाकार भी वहां कला का प्रदर्शन करेंगे।

- पीसी शर्मा, मंत्री, जनसंपर्क विधि-विधायी एवं अध्यात्म विभाग

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