यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
रज पर्व पर रंजन का मीठा पान खाना नहीं भूलते लोग
हिंदू परंपरा व रिवाजों में रज पर्व शुभ अवसरों में एक माना जाता है।

संसू, बालासोर : हिंदू परंपरा व रिवाजों में रज पर्व शुभ अवसरों में एक माना जाता है। मिथुन नक्षत्र में सूर्य के घूमने के अवसर पर मनाया जाने वाला रज पर्व (संक्राति) को दक्षिण भारत में मिथुन संक्रमण पर्व के नाम से जाना जाता है। ओडिशा में लोग इसे रज संक्रांति के रूप में मनाते हैं। आगामी 14 जून को मनाए जाने वाले रज पर्व में चार दिनों तक अनेक गतिविधियां होती हैं।
ओडिशा में कृषि वर्ष की शुरुआत के साथ-साथ विशेष रूप से इस पर्व को मनाते हुए लोग पहली बारिश का स्वागत करते हैं। रज पर्व की धूम राज्य के सभी जिलों में देखी जाती है। भुवनेश्वर से लेकर अनुगुल, बालासोर, मयूरभंज, केंद्रपाड़ा, कटक आदि जिलों के लोग पूरी तरह से रज में रंग जाते हैं। किशोरियों के लिए जगह-जगह झूले की व्यवस्था, पीठा आम, कटहल आदि फलों का सेवन तथा रज पर्व पर मीठा पान खाना लोग नहीं भूलते हैं। रज पर्व पर बालासोर के रंजन दास की दुकान का पान लोगों की पहली पसंद होता है। काजू, किशमिश, कैंडी के साथ प्रस्तुत पान खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतार लगती है। 10 रुपये से लेकर 200 रुपये तक का मीठा पान लोग शान से खरीदते है।
रंजन दास की मानें तो उनके पान के शौकीन केवल शहर में ही नहीं बल्कि उत्तर ओडिशा के साथ-साथ राज्य के विभिन्न जिलों से लोग यहा पान खाने आते हैं। रज पर्व पर मीठा पान की मांग जर्दा पान की तुलना में ज्यादा होती है। रंजन बताते हैं कि पान के रस का उल्लेख आयुकर््ेद में भी है कि पान खाने से कोई रोग नहीं होता बल्कि पाचन शक्ति बढ़ती है।
उल्लेखनीय है कि जो पर्यटक चादीपुर पंचलींगेश्वर, इमामी जगन्नाथ मंदिर आदि जगहों पर घूमने आते हैं। वे बालासोर में रंजन दास की दुकान का पान खाना नहीं भूलते। ओड़िया में एमए की पढ़ाई करने के बाद रंजन दास को जब नौकरी नहीं मिली तो पान की दुकान खोल इसे पेशा बना लिया। रंजन की दुकान में बनारसी पान, बालेश्वरी, काली बंगला, फ्लेवर पान केशर युक्त पान और कस्तूरी आदि वैरायटी उपलब्ध हैं।