Gudri Massacre: बुरुगुलीकेरा नरसंहार में पुलिस को नहीं मिला माओवादी एंगल, ये रही वजह

Gudri Massacre. बुरुगुलीकेरा नरसंहार में पुलिस को माओवादी एंगल नहीं मिला। पुलिस के अनुसंधान में पत्थलगड़ी का विरोध करना ही सात लोगों की मौत का कारण बना।

By Rakesh RanjanEdited By: Publish:Fri, 31 Jan 2020 11:35 AM (IST) Updated:Fri, 31 Jan 2020 05:01 PM (IST)
Gudri Massacre: बुरुगुलीकेरा नरसंहार में पुलिस को नहीं मिला माओवादी एंगल, ये रही वजह
Gudri Massacre: बुरुगुलीकेरा नरसंहार में पुलिस को नहीं मिला माओवादी एंगल, ये रही वजह

चाईबासा,सुधीर पांडेय। पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलीकेरा में हुए नरसंहार के आज 13 दिन हो चुके हैं। जिले के इतिहास में इस तरह के पहले हत्याकांड में पुलिस अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। 7 लोगों की गला काटकर निर्मम हत्या के आरोप में 17 पत्थलगड़ी समर्थक जेल भेजे गये हैं। वहीं, पत्थलगड़ी समर्थकों के घर में 16 जनवरी को तोडफ़ोड़ के आरोप में दो गिरफ्तारियां हुई हैं।

24 जनवरी से पुलिस एसआइटी इस कांड का अनुसंधान कर रही है। छह दिन के अनुसंधान में यह बात सामने आ रही है कि यह पूरा मामला पत्थलगड़ी से ही जुड़ा हुआ है। माओवादी व पीएलएफआइ के बीच के तार स्पष्ट नहीं हो पाये हैं। हां, इतना जरूर है कि जेम्स बुढ़ का पीएलएफआइ सदस्यों के साथ उठना-बैठना था। जेम्स और उसके साथी ग्रामीण बुरुगुलीकेरा में पत्थलगड़ी का पूरी तरह विरोध करते थे। ये लोग चाहते थे कि गांव में सरकारी योजनाएं पहुंचें ताकि रोजगार के साधन पैदा हों। साथ ही साथ ठेकेदारी का काम भी मिले। 16 जनवरी को जेम्स बुढ़ ने सहयोगी लोम्बा बुढ़, निर्मल बुढ़, कोंजे टोपनो, बोवास लोमगा, एतवा बुढ़, जावरा बुढ़, धुसरू बुढ़, सुखवा बुढ़, सुमंत ङ्क्षसह व मंगरा लुगुन के साथ मिलकर पत्थलगड़ी समर्थकों के घर पर धावा बोल दिया था। इनमें से मंगरा लुगुन पीएलएफआई सदस्य बताया जा रहा है। पुलिस मंगरा लुगुन की तलाश कर रही है मगर वो अभी तक फरार है। 

लोदरा व रोशन को कमरे में बांधकर पीएलएफआई मंगरा ने की थी पिटाई

अनुसंधान में यह पता चला है कि लोदरो बुढ़ पूर्व में गुजरात होकर आया था। उसके घर पर पत्थलगड़ी के कागजात रखे थे। जेम्स ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सारे कागजात जब्त कर लिये थे। इन लोगों ने छह पत्थलगड़ी समर्थकों के घर में घुसकर सरकार से जुड़ी सभी सामग्रियां नष्ट कर दी। बोला कि जब सरकारी योजनाओं का बहिष्कार करते हो तो सरकारी सुविधा क्यों ले रहे हो। तोडफ़ोड़ के बाद जेम्स व उसके सहयोगी लोदरा बुढ़ और रोशन बरजो को उठा कर ले गये थे। पीएलएफआई सदस्य मंगरा लुगुन ने दोनों को एक कमरे में बांध दिया था। इस दौरान मंगरा ने राणसी के घर से काफी संख्या में जब्त राशन कार्ड बरामद किये थे।

लोदरा व रोशन की आपबीती सुनकर भड़के थे पत्थलगड़ी समर्थक

लोदरा व रोशन वहां से अगले दिन किसी तरह निकले और गांव आकर राणसी बुढ़ व अन्य पत्थलगड़ी समर्थकों को सारी जानकारी दी। इससे आक्रोश में आकर राणसी ने पत्थलगड़ी समर्थकों के साथ मिलकर लूटपाट करने वाले सभी लोगों को सबक सीखाने की ठानी। 19 जनवरी को पंचायत बुलायी गयी। पंचायत में जेम्स और उसके आठ साथियों को बुलाया गया। यहां पीएलएफआई सदस्य मंगरा लुगुन को गांव लाकर लूटपाट कराने का सभी पर आरोप लगाया गया। इसके बाद सभी की पिटाई शुरू कर दी गयी। यह देख गुसरु बुढ़ व सुकवा मुंडा वहां से भागकर जंगल में छिप गये। इस बीच राणसी समेत 200 से ज्यादा लोगों ने मिलकर सातों का गला धड़ से अलग कर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद शवों को जंगल में फेंक दिया।

सरकारी संस्थाओं पर भरोसा नहीं करते पत्थलगड़ी समर्थक इसलिए 16 की घटना नहीं दी थी सूचना

पत्थलगड़ी समर्थक सरकारी संस्थाओं पर भरोसा नहीं करते हैं। यही वजह है कि 16 तारीख को गांव में हुई लूटपाट व तोडफ़ोड़ के बारे में पुलिस या फिर सिविल एडमिनिस्ट्रेशन को कोई शिकायत नहीं की गयी थी। अपना गांव, अपना शासन की तर्ज पर पत्थलगड़ी समर्थकों ने खुद ही न्याय करने का निर्णय लिया और भरी पंचायत में 7 पत्थलगड़ी विरोधियों का गला काट दिया।

कब-कब क्या हुआ 16 जनवरी : पत्थलगड़ी विरोधियों ने बुरूगुलीकेरा गांव में छह पत्थलगड़ी समर्थकों के घरों में लूटपाट, तोडफ़ोड़ व मारपीट की। 19 जनवरी : पत्थलगड़ी समर्थकों ने बुरूगुलीकेरा गांव में पंचायत बुलाकर 7 लोगों की गला काटकर हत्या कर दी। 21 जनवरी : दोपहर 1:30 बजे पुलिस अधीक्षक को 7 पत्थलगड़ी विरोधी ग्रामीणों का अपहरण कर हत्या की सूचना मिली। 22 जनवरी : सुबह 7 बजे पुलिस व सीआरपीएफ ने मिलकर जंगल से 7 ग्रामीणों के शव बरामद कर लिये 22 जनवरी : दोपहर 2:30 बजे पुलिस हत्याकांड से जुड़े तीन अभियुक्तों व शवों को लेकर लोढ़ाई कैंप पहुंची। 23 जनवरी : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुरूगुलीकेरा गांव पहुंचे और पीडि़त परिवारों से मिले। इसी दिन एसआइटी का गठन हुआ। 24 जनवरी : प्रशासन ने बंदगांव, सोनुवा, गुदड़ी में धारा 144 लागू की। 24 जनवरी : एसआइटी ने 12 अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। इनमें आठ नामजद थे। इसी दिन भाजपा सांसदों की टीम जांच के लिए पहुंची मगर उन्हें सोनुवा से आगे जाने नहीं दिया गया। 25 जनवरी : हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद हुए। फारेंसिक टीम ने भी अपनी जांच शुरू की। 26 जनवरी : सभी 15 हत्या अभियुक्तों को चाईबासा जेल भेजा गया। 27 जनवरी : सांसद गीता कोड़ा व मधु कोड़ा समेत कांग्रेस विधायक ने बुरूगुलिकेरा गांव में जाकर पीडि़तों से की मुलाकात। 28 जनवरी : ए.सी प्रभु सहाय, ए.सी दाउद लुगुन को गिरफ्तार कर पुलिस ने भेजा चाईबासा जेल। 29 जनवरी : बुरूगुलीकेरा में घरों में तोडफ़ोड़ व लूटपाट के आरोप में सुकवा मुंडा व गुसरु बुढ़ को भेजा जेल।

अब तक ये लोग भेजे गये हैं जेल

 ए.सी.सुखराम बुढ, ए.सी. राणसी बुढ, ए.सी.मनसुख बुढ, ए.सी. जीतेन्द्र बुढ, ए.सी. कोंजे बुढ, ए.सी. टीपरु बुढ, ए.सी. जयङ्क्षसह बुढ, ए.सी. बुधुवा बुढ, ए.सी. मानव बुढ, ए.सी. बुधुवा बुढ, ए.सी. सुरसेन बुढ, ए.सी. हेरमन बुढ, ए.सी. नागु बुढ़, ए.सी. कौंजे लुगून, ए.सी. सनिका लुगून, ए.सी. प्रभु सहाय टोपनो, ए.सी. दाऊद लुगुन,  सुकवा मुंडा व गुसरु बुढ़

इनकी हुई थी हत्या

लोम्बा बुढ़, निर्मल बुढ़, कोंजे टोपनो, बोवास लोमगा, एतवा बुढ़, जावरा बुढ़ व जेम्स बुढ़

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