पहले घायल की मदद, उसके बाद कानूनी प्रक्रिया : जिला जज

दुमका जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वाधान में रविवार को न्याय सदन में मोटर वाहन दुर्घटनावाद से संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला हुई। कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्राधिकार अध्यक्ष सह प्रधान जज सैयद मतलूब हुसैन ने कहा कि वाहन दुर्घटनावाद में दुर्घटना के तत्काल बाद पुलिस एवं चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस व चिकित्सक तत्परता पूर्वक प्रतिवेदन समर्पित कर दें तो पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने में सहूलियत होगी। उन्होंने पुलिस बीमा कंपनी के पदाधिकारी चिकित्सक व क्लेम करने वाले अधिवक्ताओं को सजगतापूर्वक इस प्रकार के मामले में कार्रवाई करने को प्रेरित किया।

By JagranEdited By: Publish:Sun, 01 Mar 2020 08:00 PM (IST) Updated:Mon, 02 Mar 2020 06:23 AM (IST)
पहले घायल की मदद, उसके बाद कानूनी प्रक्रिया : जिला जज
पहले घायल की मदद, उसके बाद कानूनी प्रक्रिया : जिला जज

फोटो- 5,6

जागरण संवाददाता, दुमका : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वाधान में रविवार को न्याय सदन में मोटर वाहन दुर्घटनावाद से संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला हुई।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्राधिकार अध्यक्ष सह प्रधान जज सैयद मतलूब हुसैन ने कहा कि वाहन दुर्घटनावाद में दुर्घटना के तत्काल बाद पुलिस एवं चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस व चिकित्सक तत्परता पूर्वक प्रतिवेदन समर्पित कर दें तो पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने में सहूलियत होगी। उन्होंने पुलिस, बीमा कंपनी के पदाधिकारी, चिकित्सक व क्लेम करने वाले अधिवक्ताओं को सजगतापूर्वक इस प्रकार के मामले में कार्रवाई करने को प्रेरित किया।

कहा कि वर्तमान में क्लेम वाद दाखिल करने के लिए मात्र 10 का न्याय शुल्क लगता है, जो किसी भी व्यक्ति के लिए सुविधाजनक है। इसके लिए कई जिलों में अलग से कोर्ट हैं लेकिन प्रधान न्यायालय को अधिकृत किया गया है। आये दिन दुर्घटना में हो रही मौत पर चिता जाहिर करते हुए कहा कि हमलोगों का पहला दायित्व दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को इलाज कराकर जान बचाएं। उसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करें। यह उच्चतम न्यायालय का भी निर्देश है। दायर वाद को लेकर प्राधिकार अधिवक्ता सहित अन्य सुविधा मुहैया कराती है। बीमा कंपनी के पदाधिकारियों से कहा कि समय सीमा पर मुआवजा राशि का भुगतान करें। जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय पवन कुमार ने कहा कि परहित से बड़ा कोई काम नहीं है। वर्तमान में पिता और बड़ों के आदेशों का अनुपालन नहीं करना ही अपराध की जड़ है। एक पदाधिकारी अपनी एक जगह अगर ईमानदारी से कार्यो को निष्पादन कर ले तो पूरी व्यवस्था ठीक हो जाएगी। जिला सत्र न्यायाधीश तृतीय लक्ष्मण प्रसाद ने कहा कि नर और नारायण सेवा में महत्वपूर्ण नर सेवा है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन नियमित अंतराल प्राधिकार आयोजित करेगी। मौके पर अधिवक्ता संघ के सचिव सुबोधचंद्र मंडल, डा. जावेद, अधिवक्ता राजेंद्र बसईवाला, एसडीपीओ पूज्य प्रकाश, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसपी ठाकुर, डीएसपी संतोष कुमार, श्रीराम समद के अलावा पुलिस के कई पदाधिकारी आदि मौजूद थे।

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