राज्य बीमा निगम ने खारिज किया मुआवजे का दावा

स्वदेश कुमार, पूर्वी दिल्ली : कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) ने मुआवजे के एक दावे को खा

By JagranEdited By: Publish:Fri, 06 Oct 2017 03:00 AM (IST) Updated:Fri, 06 Oct 2017 03:00 AM (IST)
राज्य बीमा निगम ने खारिज किया मुआवजे का दावा
राज्य बीमा निगम ने खारिज किया मुआवजे का दावा

स्वदेश कुमार, पूर्वी दिल्ली : कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) ने मुआवजे के एक दावे को खारिज कर दिया। दैनिक जागरण में 'मुआवजा घोटाले' की खबर प्रकाशित होने के बाद आननफानन में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई और कमेटी ने महज तीन दिन में ही राकेश मिश्रा को ढूंढ निकाला। इसी राकेश मिश्रा के बीमा नंबर पर फ्रेंड्स कॉलोनी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित अनमोल इंटरप्राइजेज ने अपने मृत कर्मचारी के परिजनों को बीमा निगम से मुआवजा दिलाने के लिए फर्जीवाड़ा किया था। इसमें बीमा निगम के कुछ अधिकारी और बिचौलिये का भी हाथ था।

अब कमेटी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज कर दिया है। साथ ही अधिकारियों व निजी कंपनी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने और अन्य कार्रवाई करने की सिफारिश के साथ जांच रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। जांच से जुड़े सहायक निदेशक आजाद ¨सह की तरफ से शिकायतकर्ता को भेजे एक पत्र से इसकी पुष्टि हुई है, जिसकी कॉपी जागरण संवाददाता के पास मौजूद है।

गौरतलब है कि अनमोल इंटरप्राइजेज में शिव विहार, करावल नगर निवासी राकेश मिश्रा (40) पुत्र राम नरेश मिश्रा काम करता था। 26 जून, 2016 को कंपनी में ही करंट लगने से उसकी मौत हो गई। इस समय तक न तो राकेश मिश्रा और न ही कंपनी ईएसआइसी में दर्ज थी। कंपनी ने मुआवजे से बचने के लिए एक बिचौलिये की मदद से जनकपुरी स्थित इंडिगो इंफ्राप्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड में 2014 तक काम करने वाले राकेश मिश्रा (26) पुत्र शशिकांत मिश्रा के ईएसआइ नंबर के आधार पर फर्जी कागज तैयार करवाए।

अगस्त 2016 में इसी बीमा नंबर को फिर से चालू कर दिया गया। इसमें 2015 से किस्तें डलवाकर मुआवजे के लिए बीमा निगम में अपील कर दी गई। इस अपील के आधार पर उपभोक्ता अदालत में अनमोल इंटरप्राइजेज को मुआवजा देने से राहत मिल गई, लेकिन अधिवक्ता अंजलि धवन और उनके सहयोगी हरीश गोयल ने इस फर्जीवाड़े से जुड़े कुछ सुबूत जुटाए और मुआवजा रद करने की शिकायत भेज दी, लेकिन बीमा निगम के अधिकारी चुप्पी साधे रहे।

इस तरह हरकत में आया बीमा निगम

'मुआवजे के लिए ¨जदा को कागजों में मार डाला' शीर्षक से दैनिक जागरण के 11 सितंबर के अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद बीमा निगम हरकत में आया। खबर प्रकाशित होने के बाद उपक्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी राजीव लाल के नेतृत्व में आजाद ¨सह, अमित भल्ला व स्नेहिल लोधी की टीम ने जांच शुरू की और जनकपुरी में रह रहे ¨जदा राकेश मिश्रा को ढूंढ निकाला। उससे पूछताछ और क्षेत्रीय कार्यालय से बीमा नंबर की तस्दीक की गई। इससे पाया गया कि न तो मृतक राकेश मिश्रा और न ही अनमोल कंपनी ईएसआइसी से रजिस्टर्ड थे। इस आधार पर दावे को खारिज कर दिया गया।

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ऐसे किया गया खेल

इंडिगो इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाले राकेश मिश्रा का ईएसआइ इंश्योरेंस नंबर 1114274369 है। मार्च 2014 के बाद अंशदान नहीं देने के कारण इसे बंद कर दिया गया था। इसी नंबर पर 2016 में अनमोल इंटरप्राइजेज ने अपने कर्मचारी राकेश मिश्रा के फर्जी कागज तैयार करवाए। इसमें इंश्योरेंस नंबर 1114274369 दर्ज है और इसका रजिस्ट्रेशन 14 दिसंबर 2013 बताया गया है, जबकि इसी कागज में अनमोल इंटरप्राजेज में राकेश की नियुक्ति की तारीख दो मार्च, 2016 दर्ज है।

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