नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। भारत अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां सभी धर्मों के लोगों को एक समान अधिकार मिला है। इसका प्रमाण त्योहारों पर देखने को मिलता है। जब सभी धर्मों के लोग एक जुट होकर त्यौहार मनाते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं। इसके लिए दुनिया भारत को शांतिदूत कहकर पुकारती है। अगर आप भी भारत की संस्कृति और सभ्यता से परिचित होना चाहते हैं, तो इन मंदिरों में जाकर देव दर्शन जरूर करें। आइए, इन मंदिरों के बारे में विस्तार से जानते हैं-

कमल मंदिर, दिल्ली

देश की राजधानी दिल्ली में यह मंदिर अवस्थित है। इतिहासकारों की मानें तो बहाई समुदाय का यह पवित्र स्थल है। इस मंदिर में न कोई मूर्ति है और न किसी की पूजा की जाती है। इसके बावजूद मंदिर में सकारात्मक शक्ति का संचार होता है। मंदिर में प्रवेश करने के साथ ईश्वरीय अनुभूति प्राप्त होती है। सभी धर्मों के लोग कमल मंदिर यानी लोटस टेंपल देखने आते हैं। साथ ही दुनियाभर से पर्यटक भारतीय संस्कृति और सभ्यता से परिचित होने के लिए कमल मंदिर आते हैं। भारत में कमल के फूल को पवित्र माना जाता है। इसके लिए भारत का राष्ट्रीय फूल कमल है। देव अनुभूति और मन-मस्तिष्क की शांति के लिए एक बार कमल मंदिर जरूर जाएं।

स्वर्ण मंदिर, अमृतससर

अंग्रेजी में स्वर्ण मंदिर को गोल्डन टेम्पल भी कहा जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर में चार दरवाजे हैं। इसका तात्पर्य यह है कि सभी धर्मों के लोग मंदिर आ सकते हैं। पंजाब का यह पवित्र धार्मिक और मुख्य पर्यटन स्थल में से एक है। हर साल लाखों की संख्या में लोग स्वर्ण मंदिर बाबा के दरबार पर मत्था टेकने आते हैं। मंदिर दुनियाभर में अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है। आप भी भारत की संस्कृति से रूबरू होने के लिए गोल्डन टेम्पल जाकर देव दर्शन जरूर करें।

महाबोधि मंदिर, बोधगया

बिहार राज्य के बोधगया जिले में स्थित यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। खासकर बौध धर्म के अनुयायियों के लिए यह मक्का-मदीना के समतुल्य है। इतिहासकारों की मानें तो बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। साथ ही बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध ने सर्वप्रथम ज्ञान का उपदेश दिया था। इसके लिए यह स्थल बेहद पावन है। इसके अलावा, गया में कई अन्य मंदिर भी हैं और पिंडदान भी किया जाता है। इसके लिए सालों भर लोग गया आते हैं। आपको जब कभी मौका मिले, तो देव दर्शन हेतु एक बार बोधगया जरूर घूमने जाएं।

Edited By: Umanath Singh