इस गांव की गली-गली में दिखते हैं हमशक्ल! सैकड़ों जुड़वां बच्चों वाली केरल की यह जगह आज भी है पहेली
क्या आप किसी ऐसे गांव के बारे में सोच सकते हैं, जहां आपको गली-गली हमशक्ल बच्चे दिखाई दें? जी हां, ...और पढ़ें

इस गांव में जुड़वां बच्चों का जन्म है आम बात (Image Source: AI-Generated)
HighLights
केरल का कोडिन्ही गांव 'भारत का ट्विन टाउन' कहलाता है
यहां जुड़वां बच्चों के जन्म की दर राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है
वैज्ञानिकों के लिए यह रहस्य आज भी एक अनसुलझी पहेली है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जरा सोचिए एक ऐसी जगह के बारे में, जहां आप सड़क पर चल रहे हों और आपको हर तरफ एक जैसी शक्ल वाले बच्चे खेलते-कूदते या स्कूल जाते नजर आएं। भले ही, पढ़ने में यह किसी दिलचस्प फिल्म का सीन लगता हो, लेकिन केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित 'कोडिन्ही' गांव में यह कोई कहानी नहीं, बल्कि बिल्कुल सच है।
दुनिया के लिए यह भले ही एक बहुत बड़ा रहस्य हो, लेकिन यहां के निवासियों के लिए हमशक्ल चेहरे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक खूबसूरत हिस्सा हैं। भारत के 'ट्विन टाउन' के नाम से मशहूर इस गांव की कहानी जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही दिल को छू लेने वाली भी है।

(Image Source: AI-Generated)
हैरत में डालने वाले आंकड़े
इस छोटे से गांव की आबादी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन इसके आंकड़े किसी को भी चौंका सकते हैं:
- यहां लगभग 2,000 परिवार बसते हैं।
- इन परिवारों के बीच जुड़वां बच्चों के 400 से लेकर 550 जोड़े मौजूद हैं।
- कोडिन्ही में जुड़वां बच्चों के जन्म लेने की दर प्रति 1,000 डिलीवरी पर 42 से 45 है, जो भारत के राष्ट्रीय औसत से कई गुना ज्यादा है।
- सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह कोई हालिया घटना नहीं है, बल्कि दशकों से हर साल नए जुड़वां बच्चे जन्म ले रहे हैं।
वैज्ञानिकों के लिए अनसुलझी पहेली
देश और विदेश के कई बड़े शोधकर्ताओं ने इस रहस्य से पर्दा उठाने की पूरी कोशिश की है। उन्होंने गांव के पानी, पर्यावरण, लोगों के खान-पान और लाइफस्टाइल की बहुत बारीकी से जांच की।
दुनिया के कुछ हिस्सों में खास तरह के भोजन को जुड़वां बच्चों के जन्म का कारण माना जाता है, लेकिन कोडिन्ही में ऐसा कोई सुराग हाथ नहीं लगा। वैज्ञानिकों ने प्रदूषण, रसायनों और जीवनशैली से जुड़े कारणों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। हालांकि जेनेटिक्स को एक संभावित वजह माना जाता है, लेकिन आज तक विज्ञान कोई भी पक्का जवाब नहीं ढूंढ पाया है।
गांव के लोग मानते हैं ईश्वर का आशीर्वाद
जहां बाहरी लोग और वैज्ञानिक इसे केवल एक अजूबा मानते हैं, वहीं गांव वालों ने इस अनोखेपन को अपनी सबसे बड़ी ताकत और पहचान बना लिया है। इसी एकता की भावना से साल 2008 में 'ट्विन्स एंड किन्स एसोसिएशन' नाम की एक अनूठी संस्था की शुरुआत हुई।
यह संस्था न सिर्फ गांव में पैदा होने वाले नए जुड़वां बच्चों का हिसाब रखती है, बल्कि माता-पिता को उनकी परवरिश से जुड़ी सलाह और मदद भी देती है।
इंटरनेट पर भले ही लोग इसे किसी जादुई जगह की तरह देखते हों, लेकिन गांव के लोगों का स्वभाव इसे लेकर बहुत ही शांत हैं। वे अपने इस अनोखेपन को तमाशा नहीं मानते, बल्कि इसे ईश्वर का एक प्यारा आशीर्वाद समझते हैं।
