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दुनिया घूमने आए विदेशी भी नहीं जा सकते भारत की इन जगहों पर, खूबसूरती के पीछे छिपे हैं कड़े नियम

By Meenakshi NaiduEdited By: Shweta Chauhan
Published: Fri, 30 Oct 2026 06:00 PM (IST)

भारत में कुछ ऐसे टूरिस्ट स्पॉट हैं जहां विदेशी नागरिकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित या नियंत्रित है।

भारत की वो जगहें जहां विदेशी लोगों को भी नहीं एंट्री (Image Source: AI Generated)

भारत की वो जगहें जहां विदेशी लोगों को भी नहीं एंट्री (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हर साल लाखों विदेशी पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे टूरिस्ट स्पॉट भी हैं, जहां विदेशी नागरिकों की एंट्री पूरी तरह बैन है? 

यह प्रतिबंध किसी भेदभाव के कारण नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आदिवासी संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए लगाया गया है। आइए जानते हैं ऐसी प्रमुख जगहें और इनके पीछे की वजहों के बारे में

उत्तर सेंटिनल द्वीप

सबसे पहले बात करतें हैं उत्तर सेंटिनल द्वीप (अंडमान- निकोबार) की यह द्वीप सेंटिनलीज जनजाति का घर है, जो आज भी आधुनिक दुनिया से पूरी तरह अलग रहती है। बाहरी लोगों के संपर्क में आने से उन्हें गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है और उनकी जीवनशैली प्रभावित हो सकती है। इसलिए भारत सरकार ने यहां किसी भी बाहरी व्यक्ति, चाहे वह भारतीय हो या विदेशी, के जाने पर सख्त प्रतिबंध लगा रखा है।       

नाभा रिजर्व फॉरेस्ट 

दूसरी महत्वपूर्ण जगह है नाभा रिजर्व फॉरेस्ट और आसपास के कुछ सीमावर्ती क्षेत्र, जहां सुरक्षा कारणों से विदेशी नागरिकों की आवाजाही सीमित रहती है। इन इलाकों में सैन्य गतिविधियां और संवेदनशील सीमाएं होने के कारण सरकार यहां विशेष अनुमति के बिना प्रवेश की इजाजत नहीं देती।

पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्से 

इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में भी विदेशियों को परमिट की आवश्यकता होती है। इन क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्र (प्रोटेक्टेड एरिया) घोषित किया गया है जिससे स्थानीय संस्कृति, जैव विविधता और राष्ट्रीय सुरक्षा बनी रहे।

लक्षद्वीप के कुछ द्वीप

लक्षद्वीप के कुछ द्वीप ऐसे भी हैं, जहां विदेशी पर्यटकों की एंट्री सीमित या नियंत्रित रहती है। इसका मुख्य कारण पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आबादी की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना है। अत्यधिक पर्यटन से समुद्री जीवन और कोरल रीफ को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए सरकार यहां नियंत्रित पर्यटन को बढ़ावा देती है।

इसके अलावा, लद्दाख और हिमालयी सीमावर्ती इलाकों के कुछ हिस्से सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। यहां सेना की गतिविधियां होने के कारण विदेशी नागरिकों को बिना विशेष अनुमति प्रवेश नहीं मिलता। 

क्यों है इन जगहों पर इतनी सुरक्षा?         

इन जगहों पर प्रतिबंध का उद्देश्य पर्यटकों को रोकना नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, आदिवासी समाज की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखना है। 

कुल मिलाकर, भारत के ये प्रतिबंधित टूरिस्ट स्पॉट हमें यह समझाते हैं कि पर्यटन के साथ-साथ जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी जरूरी है।अगर हम नियमों का पालन करते हुए यात्रा करें, तो न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं बल्कि प्रकृति और संस्कृति की रक्षा में भी योगदान दे सकते हैं।

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