अच्छेलाल वर्मा, रायसेन: पर्यटन के लिहाज से मध्य प्रदेश काफी समृद्ध स्थान है। धार्मिक पयर्टन हो या वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा अथवा हिल स्टेशन, मध्य प्रदेश अनेकानेक विकल्प प्रस्तुत करता है। इन्हीं पर्यटन स्थलों में से एक है राजधानी भोपाल से 55 किलोमीटर दूर स्थित सांची का स्तूप। यूं तो विश्व धरोहर सांची का स्तूप दो हजार वर्षों से विश्व भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र रहा है, लेकिन अब यहां बना बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गया है। रायसेन जिले में स्थित बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क के निर्माण से यहां के पर्यटन को पंख लग गए हैं। सांची स्तूप के पहुंच मार्ग पर 17 एकड़ क्षेत्र में बने इस पार्क में भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की जातक कथाओं का विस्तृत चित्रण किया गया है। यहां पर भगवान बुद्ध के जन्म से लेकर निर्वाण तक की संपूर्ण जानकारी भी एक ही स्थान पर प्राप्त होती है।

यह देश में अपनी तरह का पहला पार्क है। इस थीम पार्क को महात्मा बुद्ध के जीवन सिद्धांतों के अनुसार बनाया गया है। इसमें जीवन परिक्रमा पथ, चंद्रवाटिका, अष्टांगिक मार्ग एवं जातकवन हैं जिसमें बच्चों के लिए जातक कथाएं एवं पहेलियां हैं। पार्क में वाटर स्क्रीन, थ्री डी प्रोजेक्शन मैपिंग की भी व्यवस्था है। बुद्ध जम्बूद्वीप पार्क में इंटरप्रिटेशन सेंटर भी बनाया गया है। बुद्ध और बौद्ध धर्म का एक विस्तृत कालानुक्रमिक समय, इसका उद्धव, विस्तार और प्रसार सेंटर की गैलरियों में प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रथम गैलरी में बुद्ध के जीवन के महान क्षण, द्वितीय गैलरी में बौद्ध कला और वास्तुकला, तृतीय गैलरी में भारत में बौद्ध धर्म का प्रसार और चतुर्थ गैलरी में एशिया में बौद्ध धर्म का प्रसार प्रस्तुत किया गया है।

इंटरप्रिटेशन सेंटर के बाहर लगे बौद्ध घंटाल। नईदुनिया

बुद्ध के जीवन के चार महान क्षणों का प्रतिनिधित्व करने वाला परिक्रमा पथ चार प्रतीकात्मक पेड़ों का उपयोग करके बनाया गया है। इसमें चार वृक्ष साल, पीपल, अशोक और आम के वृक्ष रोपित किए गए हैं। पार्क में अलग-अलग रंगों के पत्थर का उपयोग कर पाथवे और पवेलियन में प्रतीकात्मक रूप से बौद्ध धर्मानुसार जीवन के चार सत्य दुख, दुख का कारण, दुख का समापन और मार्ग को दर्शाया गया है। अंतिम सत्य अष्टांग मार्ग है जो मानव के लिए प्रेरणादायी है।

केंद्र सरकार के सहयोग से निर्माण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जो योजनाएं स्वीकृत की हैं, उनके अनुसार दो वर्ष पूर्व इस पार्क का निर्माण करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। मप्र पर्यटन विकास निगम ने पांच करोड़ रुपये की लागत से पर्यटक सुविधा केंद्र भी यहां निर्मित किया है। पर्यटकों के लिए सांची में सम्राट अशोक एवं महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित थीम पर एक लाइट एंड साउंड शो का भी संचालन किया जा रहा है। कैफेटेरिया, जनसुविधा, मेडिटेशन कियोस्क, पाथवे पवेलियन, कनक सागर तालाब का सुंदरीकरण, एंफिथियेटर, बच्चों के खेलने का पार्क, संपूर्ण क्षेत्र में लान, वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम और आकर्षक लाइटिंग इस स्थान की शोभा में चार चांद लगाते हैं।

सांची स्तूप मार्ग पर स्थित बुद्ध जंबूद्वीप पार्क का मुख्य द्वार। नईदुनिया

इन स्थानों का भी करें भ्रमण

जम्बूद्वीप पार्क और सांची स्तूप देखने के बाद पर्यटक यहां से साठ से अस्सी किमी तक के दायरे में स्थित विश्व संरक्षित धरोहर भीमबैठका, विश्व के सबसे बड़े पाषाण शिवलिंग भोजपुर मंदिर भी देख सकते हैं। इसके अलावा रायसेन में स्थित दो हजार वर्ष प्राचीन किला, सतधारा व मुरैलखुर्द स्थित प्राचीन बौद्ध स्तूपों की शृंखला एवं उदयगिरी की गुफाएं देखने लुत्फ भी पर्यटक उठा सकते हैं।

सांची गेटवे रिट्रीट के प्रबंधक अशोक अरोरा ने बताया कि बुद्ध जंबूद्वीप पार्क बनने के बाद से पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ी है। मप्र पर्यटन निगम के गेटवे रिट्रीट में पर्यटकों को ठहरने के लिए चालीस कमरों की सुविधा है। पार्क व स्तूप तक पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध हैं।

सांची स्तूप के प्रभारी संदीप महतो ने बताया कि पहले विश्व संरक्षित धरोहर सांची स्तूप देखने के लिए वर्ष भर में करीब एक लाख पर्यटक आते थे जो कि अब बढ़कर दो लाख से अधिक हो गए हैं। यहां आने वाले पर्यटक बुद्ध जंबूद्वीप पार्क भी देखने पहुंचते हैं।

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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