मकर संक्राति आने में कुछ ही दिन बचे हैं. ऐसे में आपने भी तैयारियां कर ली होगी. विविधाताओं से भरे इस देश में मकर संक्राति भी अलग-अलग राज्यों में खास अंदाज में बनाई जाती है. अगर आपको भी इस बार मकर संक्राति के अलग रंग देखने हैं, तो आप इन राज्यों में घूमकर अपने मकर संक्राति कुछ अलग अंदाज में मना सकते हैं. 

आंध्र प्रदेश और तेलगांना 

इस दौरान यज्ञ का आयोजन किया जाता है जिसे शुद्धिकरण और बदलाव का प्रतीक माना जाता है. साथ ही इस दौरान छोटे बच्चों को बुराई से बचाने के लिए भी पूजा की जाती है. इसके अलावा पूर्वजों की याद में भी पूजा-अर्चना की जाती है. मिठाई, कपड़े, पैसे आदि बांटे जाते हैं.

गोवा 

गोवा में आयोजन महाराष्ट्र की तरह ही होता है. इस दिन महिलाएं ‘हल्दी-कुमकुम’ खेलती हैं. 

गुजरात 

गुजरात में इसे ‘उत्तरायन’ के नाम से मनाया जाता है. यह त्योहार दो दिन चलता है. 14 तारीख को उत्तरायन और 15 तारीख को ‘बासी उत्तरायन’ मनाया जाता है. साथ ही इस दिन पतंग भी उड़ाई जाती है. इस दिन उंधियू, तिल चिक्की और लड्डू बनाए जाते हैं. 

 

हिमाचल प्रदेश 

हिमाचल में इसे माघ साजी कहा जाता है. पहाड़ी लोग नए महीने की शुरूआत को साजी कहते हैं. कहा जाता है कि इसी दिन से पक्षी पहाड़ों पर लौटने लगते हैं. इस दिन लोग सुबह ही नहा-धोकर जलार्पण करते हैं. इस दिन लोग लोक नृत्य और संगीत के साथ खिचड़ी-छाछ का भी आनंद लेते हैं.

कर्नाटक

कर्नाटक में इस सुग्गी कहा जाता है. इस दिन लड़कियां नए कपड़े पहनकर रिश्तेदारों के घर जाती हैं. कर्नाटक में भी तिल-गुड़ के पकवान बनाए जाते हैं. यह त्योहार फसल कटाई के लिए मानाया जाता है. यहां गन्ने, लाल बेर, हल्दी, कुमकुम का महत्व इस दिन काफी ज्यादा होता है. इस दिन गायों को सजाने की भी परंपरा है.

महाराष्ट्र 

महाराष्ट्र में इस दिन रंगीन हलवे के साथ तिल-गुड के लड्डू बनाए और बांटे जाते हैं. इसके अलावा पूरण पोली भी बनाई जाती है. महाराष्ट्र की तरह ही आंध्र प्रदेश और गोवा में मकर संक्रांति मनाई जाती है.

तमिलनाडु

तमिलनाडु में इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है. इसे त्योहार को भरपूर रंग के साथ उल्लास के साथ मनाया जाता है. चार दिनों तक रंगोत्सव मनाया जाता है. इस दौरान पुरान कपड़े फेंककर नए कपड़े आते हैं. इससे बुराई और पुरानापन बाहर जाता है. साथ ही चावल, दूध और गुड़ से पोंगल बनाया जाता है. इस दौरान केवल नई फसल का प्रयोग किया जाता है.

 

By Pratima Jaiswal