शेक्सपियर ने रोमियो-जूलियट की प्रेम कहानी को अमर कर दिया है। दुनिया में सबसे ज्यादा मंचन इसी नाटक के हुए। यह एक नाटक है इसके पात्र काल्पनिक हो सकते हैं, लेकिन इटली के एक शहर वेरोना में जूलियट की बालकनी है। पता नहीं जूलियट वास्तव में थी या नहीं, लेकिन इस बालकनी को देखने और रोमांस की फैंटेसी को जीने के लिए सैलानियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। खासकर प्रेम में डूबे युवा यहां आकर जूलियट की मूर्ति को छूकर अपने प्यार की कसमें खाते हैं और उसके गहरे होने की मन्नत मांगते हैं। इतना ही नहीं, वे अपने प्यार से दीवारें भी रंग जाते थे। लव कोट्स, इमोशन्स को पेज़ पर लिखकर चुइंगम से दीवारों पर चिपकाने लगे थे जिससे इस 13वीं शताब्दी के घर की दीवारें खराब होने लगी थीं, लेकिन अब दिल का हाल लिखने और जूलियट से प्यार की गाइडेंस मांगने के लिए दीवारों पर पैनल बना दिए गए हैं। दीवानों की कारीगरी से अटे पड़े हैं यह। 

इटली की दूसरी सबसे बड़ी लेक कही जाने वाली लेक मैग्गिओरे से वेनिस क्षेत्र में आने के दौरान जब वेरोना शहर में रूकना हुआ तो यूरोप के इस पुराने शहर की तंग गलियों से होते हुए, भीड़ को चीरते हुए हम जूलियट की बालकनी पहुंचे। वहां एक सादा-सा घर था। एक सादे से गेट में एक तरफ से लोग आ रहे थे और दूसरी तरफ से निकल रहे थे। मैनेज करने के लिए कोई दिखा नहीं, लेकिन छोटे से आंगन में जूलियट की आदमकद मूर्ति दिख जाती है। जब हम उसके पास गए तो वहां सैलानियों ने बताया कि जूलियट के दाहिने वक्ष को छूकर प्यार की लंबी उम्र मांगी जाती है और अपने प्यार को सदाबहार देखने के लिए सब ऐसा करने की कोशिश में थे। जहां टूरिस्ट उमड़ें वहां बाजार तो बस ही जाता है। जूलियट के कशीदे वाले सोवेनियर दस मिनट में तैयार कर दिए जाते हैं। हां, किसी छोटी सी चीज के लिए दस-बीस यूरो तो देने ही पड़ते हैं, लेकिन जूलियट से मुलाकात दिल खुश कर जाती है। एक वह पात्र जिसे आपने अभी तक सिर्फ किताबों में जिया है उसकी मौजूदगी का एहसास रोमांचित कर जाता है।

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