वंदे भारत और दूसरी नई ट्रेनों में इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम का कैसे करें यूज? मुसीबत में तुरंत पहुंचेगी मदद
वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों में 'चेन पुलिंग' की जगह पैसेंजर टॉक-बैक सिस्टम काम करता है। यह आपात स्थिति में ...और पढ़ें

बिना ट्रेन रोके तुरंत पहुंचेगी मदद! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको मालूम है कि वंदे भारत, अमृत भारत और ऐसी नई आधुनिक ट्रेनों में 'चेन पुलिंग' व्यवस्था की जगह पैसेंजर टॉक-बैक सिस्टम ने ली हुई है?
जी हां, अगर ट्रेन में कोई भी मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, आग लग जाए या सुरक्षा से जुड़ी कोई दुर्घटना हो, तो आप इस सिस्टम की मदद से सीधे लोको पायलट और गार्ड से बात कर सकते हैं। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि मुश्किल वक्त में इस सुविधा का इस्तेमाल कैसे करना है।
1) टॉक-बैक यूनिट को ढूंढें
हर कोच में अंदर और बाहर निकलने वाले दरवाजों या वॉशरूम के ठीक पास दीवार पर एक लाल या सफेद रंग का बॉक्स लगा होता है। इसे ही इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट कहते हैं। इसमें एक छोटा स्पीकर, माइक और एक लाल रंग का बटन होता है। आपको बॉक्स पर 'Passenger Alarm' या 'Emergency Talk-Back' लिखा हुआ दिखाई देगा।
2) लाल इमरजेंसी बटन दबाएं
आपातकाल स्थिति होने पर, इस लाल बटन को 2 से 3 सेकंड तक कसकर दबाकर रखें। अगर बटन के ऊपर कोई कांच या प्लास्टिक का सुरक्षा कवर लगा है, तो पहले उसे हटा लें। बता दें, बटन दबाते ही सिस्टम में लगी एक छोटी लाइट जल जाएगी या ब्लिंक करने लगेगी, जिसका मतलब है कि आपका संपर्क ड्राइवर के कैबिन से हो रहा है।
3) माइक के पास आकर साफ आवाज में करें बात
जैसे ही लोको पायलट या गार्ड आपकी कॉल उठाएंगे, आपको स्पीकर से उनकी आवाज सुनाई देगी। तुरंत माइक के पास जाएं और अपना कोच नंबर बताते हुए अपनी परेशानी साफ-साफ बताएं (जैसे- "कोच C-4 में एक यात्री को हार्ट अटैक आया है")। इसके बाद, लोको पायलट आपकी बात सुनकर कन्फर्म करेंगे कि उन्हें आपकी जानकारी मिल गई है और वे तुरंत मेडिकल मदद भेज रहे हैं।
बिना जरूरत न करें इस्तेमाल
इस सिस्टम का इस्तेमाल सिर्फ असली इमरजेंसी (जैसे गंभीर बीमारी, अपराध, आग या तकनीकी खराबी) में ही करें। मजे के लिए या बिना वजह बटन दबाकर लोको पायलट को परेशान करने पर रेलवे अधिनियम के तहत भारी जुर्माना लग सकता है और जेल भी हो सकती है।
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा
पुरानी चेन पुलिंग व्यवस्था में चेन खींचने पर ट्रेन कहीं भी सुनसान जगह पर रुक जाती थी, जिससे मदद पहुंचने में काफी देरी होती थी। हालांकि, टॉक-बैक सिस्टम से लोको पायलट को पूरी स्थिति का पता चल जाता है और वह ट्रेन को अगले सुरक्षित स्टेशन या प्लेटफॉर्म पर ही रोकता है, जहां पहले से डॉक्टर या रेलवे पुलिस आपकी मदद के लिए तैयार खड़ी मिलती है।
