यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 11, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
लेखकीय यादों का सफर
लेखकों-साहित्यकारों ने कम देखी गई जगहों की यात्रा कर उनके बारे में रोचक तरीके से किताबें लिखकर ब्लॉग और फेसबुक ...और पढ़ें

दिल्ली से मैं भाग जाना चाहता था। हालांकि मैं वहां लिख रहा था, लेकिन और बेहतर लिखने के लिए मुझे शांत, सुंदर और सुरम्य वातावरण चाहिए था। इसलिए मैं मसूरी चला आया और यहीं का होकर रह गया। उस समय मसूरी एकदम वीरान थी। एक साक्षात्कार के दौरान ये बातें बताईं बच्चों के चहेते कथाकार रस्किन बॉन्ड ने। तब से रस्किन मसूरी में बसने लगे और मसूरी रस्किन में। यहीं उन्होंने कई प्रसिद्ध उपन्यास लिखे, जिसमें कतरे-कतरे रूप में मौजूद रही मसूरी, वहां की गलियां और चौक भी। इन कहानियों से मसूरी इतनी मशहूर हुई कि आज भी जो पर्यटक मसूरी आते हैं, उनमें मसूरी का लैंढोर कस्बा और वहां रह रहे रस्किन को देखने की लालसा सबसे पहले जागती है। रस्किन के अलावा, मसूरी में अनीता देसाई, बिल एटकन, स्टीफन आल्टर जैसे नामचीन लेखकों-साहित्यकारों के घर भी मौजूद हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और कवि अटल बिहारी वाजपेयी को भी मसूरी से बहुत लगाव था। अब तो मसूरी पर्यटन के मानचित्र पर सबसे अधिक पर्यटक आमद वाले स्थानों में से एक हो गया है। रस्किन की तरह और भी कई लेखक अनजान-सी जगहों पर गए, वहां घूमे-फिरे, वहां की खासियतों के बारे में रोचक तरीके से लिखकर उन्हें लोकप्रिय बना दिया।


दिलचस्प वृतांत
रस्किन की ही तरह आयरिश मूल के भारतीय लेखक और दार्शनिक जिम कॉरबेट ने नैनीताल के कालाढूंगी नामक स्थल को अपना घर बनाया था। दिलचस्प यह है कि पहले तो जिम कॉरबेट वहां आदमखोर बाघों का शिकार कर आम लोगों की सहायता किया करते थे, लेकिन बाघों की संख्या घटने पर बाद में उनके संरक्षण से जुड़ गए। उन्होंने अपनी लेखनी के जरिए न सिर्फ कालाढूंगी, बल्कि नैनीताल के कई मनोरम स्थलों, रुद्रप्रयाग आदि के बारे में लोगों को बताया। कुमाऊं, गढ़वाल तथा बाघों से जुड़े अपने किस्से-कहानियों को उन्होंने अपनी किताबों माई इंडिया', मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं' आदि में लिखा है। उनके नाम पर रखे गए विख्यात जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान को देखने और उनकी यादों को महसूस करने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं।

चर्चा में आया आदि कैलाश
कैलाश मानसरोवर की तरह आदि कैलाश पर्वत तक पहुंचने के लिए भी कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। ब्लॉगर व लेखक उमेश पंत ने आदि कैलास की यात्रा की और किताब लिखी 'इनरलाइन पास'। उमेश पंत कहते हैं, 'इस किताब को पढ़ने के बाद कम से कम आधे दर्जन लोगों ने मुझे बताया कि वे आदि कैलाश की यात्रा पर गए। मेरे ख्याल से यहीं पर मेरा लिखना सफल हो गया।' दरअसल, आम पर्यटक उन जगहों पर जाते हैं, जो पहले से नामचीन होते हैं, लेकिन लेखक अनजानी या कम जानी जगहों पर जाते हैं। बाद में उनके द्वारा सुंदर शब्दों और शैली में दी गई जानकारी लोगों को वहां तक खींच लाती है। इन दिनों ट्रैवलर भ्रमण कर रहे हैं और अपने अनुभवों और संस्मरणों को ब्लॉग, फेसबुक, वेबसाइट पर भी शेयर कर रहे हैं। इसके जरिए छोटी-छोटी जगहें भी खूब लोकिप्रिय हो रही हैं।


आज भी लेखक हवाई जहाज या शाही ट्रेनों की बजाय साधारण तरीके से मोटरसाइकिल, साइकिल और पैदल अनजान जगहों की यात्रा करते हैं और दिल को छू जाने वाला विवरण प्रस्तुत करते हैं। इस पर नीरज अपने अनुभव सुनाते हैं कि बिना योजना बनाए और साधारण तरीके से यात्रा करने पर ही आप असाधारण जगहों को एक्सप्लोर कर पाते हैं। इससे पर्यटकों को यह संदेश मिलता है कि कम पैसे में भी खूबसूरत जगहों की यात्रा की जा सकती है।
