जैसे-जैसे दीपों का उत्सव करीब आता है मन में मिठास सी घुलने लगती है। घर को सजाने के लिए त्योहार के दिन को कुछ खास बनाने के लिए शिद्ददत से परंपरागत चीज़ों की खरीददारी हो रही है। घर-आंगन में दीपों की लौ भले सब अपनी रीतियों से जलाएं पर रोशनी अंधेरे को ढक...घरों को उज्जवल बनाती है, रिश्तों को प्रगाढ़ करती है। तो आइए जानते हैं दीपों के इस त्योहार से जुड़ी रीतियों और इस अवसर पर बनाए जाने वाले व्यंजनों के बारे में. ..

दिवाली में लक्ष्मीपूजन, रंगोली बनाना, मिठाइयां बांटना और पटाखे जलाने के साथ घर में तरह-तरह के व्यंजन बनाने की परंपरा तो हर एक जगह है लेकिन कुछ जगहों पर त्योहारों के मायने किसी खास रीति-रिवाजों से जुड़ा होता है जिसके बिना फेस्टिवल अधूरा है। गुजराती लोग ऐसे ही एक ट्रेडिशन को काफी टाइम से फॉलो करते आ रहे हैं।

हर गुजराती के घर बनता है मोहनथाल

दिवाली पर पूड़ी, सब्जी, खीर मिठाई रंगोली बनाते हैं। दिवाली की तैयारियां गुजराती समाज में लगभग 15 दिन पहले शुरु हो जाती है। सभी लोग नए-नए कपड़े खरीदते हैं और घर की साफ-सफाई करते हैं। उसके बाद घर में अपने हाथों से सारी मिठाइयां बनाई जाती हैं। चकरी, बेसन, सेव, मठिया व अलग-अलग प्रकार के नमकीन बनाए जाते हैं और सबसे खास मोहनथाल (बेसन की मिठाई), बनाने का रिवाज भी है। यह मिठाई हर गुजराती के घर में बनती है। सभी व्यापारी अपने सारे पुराने हिसाबों को निपटाकर नए की शुरूआत करते हैं। उसके बाद आता है धनतेरस। धनतेरस के दिन हर एक घर में लक्ष्मीपूजन होता है और माताजी को छप्पन भोग लगते हैं। सारे घर के लोग इकट्ठा होकर मां लक्ष्मी की अराधना करते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा उन पर बनी रहें, ऐसी कामना करते हैं। दिवाली के साथ ही गुजरातियों के नए साल की शुरुआत हो जाती है इसलिए इस दिन को बड़े खास तरीके से उल्लास के साथ मनाते हैं।

Posted By: Priyanka Singh

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