नई दिल्ली से एयर इंडिया की सीधी, लेकिन सोलह घंटे की फ्लाइट के बाद जब सैन फ्रांसिस्को पहुंचे तो शाम के छह बज चुके थे, लेकिन जैसे ही एयरपोर्ट से बाहर कदम रखा तो ठंडी हवा के झोंकों के साथ दिलकश नजारों ने जैसे थकान व नींद सब काफूर कर दी हो। जैसा सुना था, जैसी कल्पना की थी...प्रशांत महासागर के किनारे बसे इस शहर की एक झलक में ही इसे कहीं ज्यादा रोमांचित कर देने वाला पाया।

एकबारगी लगा जैसे किसी पर्वतीय इलाके में पहुंच गए हों, लेकिन जैसे-जैसे हमारी टैक्सी एयरपोर्ट से टिबूरोन की तरफ बढ़ने लगी, जहां हमारा ठिकाना था, हम समुद्र व इस शहर के बीच चोली दामन का साथ देखते चले। चकाचक सड़कें और सुव्यवस्थित ट्रैफिक भारत से जाने वाले किसी को भी प्रभावित करता ही है। अंधेरा हो चला था और हम शहर के बाहरी छोर से होते हुए गुजर रहे थे। सड़क के दोनों ओर नुकीली छत वाले घर, दुकानें बेहद खूबसूरत लगीं। तभी टैक्सी ड्राइवर ने कहा, अब हम गोल्डन गेट ब्रिज से गुजरेंगे, आप चाहें तो वीडियो बना सकते हैं। अरे वाह..जिस गोल्डन गेट ब्रिज से सैन फ्रांसिस्को की पहचान है, हम शहर में पहुंचते ही वह देखने वाले थे, यह जानकर गदगद हो गए।

हल्के अंधेरे के बीच मध्यम रोशनी में नहा रहे ब्रिज से हम गुजरे, तो जैसे एक तमन्ना पूरी होने लगी हो। करीब दो किमी. का पुल हम देखते ही देखते क्रास कर गए। थोड़ी देर में टिबूरोन पुहंच गए, जहां एक लॉज में रहने की व्यवस्था थी। पहले से पहुंचे कुछ साथी हमारा डिनर पर इंतजार कर रहे थे। यहां लोग डिनर छह सात बजे शुरू कर देते हैं। अमेरिकी भोजन में शाकाहारियों के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं। हां, सलाद बहुत बेहतरीन मिलते हैं। बाद में हमें शहर के कुछ ऐसे ईटिंग प्वाइंट्स का पता चल गया, जहां भारतीय या मैक्सिकन अच्छा शाकाहारी खाना मिल जाता है। जो नॉन वेज के शौकीन थे, उनके लिए कई विकल्प थे।

सस्पेंश ब्रिज का नायाब नमूना

चूंकि पिछले दिन केवल एक झलकी गोल्डन गेट ब्रिज की पाई थी, इसलिए इच्छा थी कि वहां आराम से जाकर नजदीक से दीदार किए जाएं। इसलिए जब शहर भ्रमण की बारी आई तो पहला पड़ाव वही था। हम कार से वहां गए। दोनों छोरों से इसका नजारा अलग है। भव्य है। उत्तर दिशा में ऊपर कुछ दूर पहाड़ी पर जाकर इसके दीदार पर्यटक करते हैं। हम भी पहुंचे और फोटो खींचे। फिर दूसरे छोर से जाकर भी देखा। ज्यादातर पर्यटक यहीं आते हैं और यहीं पता चलता है इस पुल का इतिहास व महत्व।

सैन फ्रांसिस्को नगर को खाड़ी के दोनो छोरों से जोड़ने वाला यह सस्पेंशन ब्रिज इंजीनियरिंग का अद्भुत करिश्मा है। अमेरिका के राष्ट्रीय राज मार्ग 101 पर स्थित पुल 1937 में जब बनकर तैयार हुआ था तो दुनिया का सबसे लंबा सस्पेंशन (झूला) पुल था। तब से आज तक यह सैन फ्रांसिस्को का अंतरराष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह है। सैन फ्रांसिस्को खाड़ी को प्रशांत महासागर से जोड़ने यह पुल 4200 फीट लंबा, 90 फीट चौड़ा, समुद्र तल से 220 फीट ऊंचा है जिसमें 6 ड्राइविंग लेन और दो साइडवॉक हैं, जिनकी चौड़ाई क्रमश: 62 फीट और 10 फीट है। इसे गोल्डन गेट इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसे नारंगी रंग से रंगा गया है ताकि कोहरे में भी दिखाई दे। यहां कोहरा काफी पड़ता है। आठ डिग्री मैग्नीट्यूड तक के भूकंप और 90 मील प्रति घंटे तक के तूफान को यह सह सकता है। सचमुच अद्भुत है गोल्डन गेट और यहां से दिखने वाला नजारा। 

लोम्बार्ड स्ट्रीट- दुनिया के सबसे तीखे मोड़ 

हमारा अगला पड़ाव था लोम्बार्ड स्ट्रीट। कई फिल्मों व पोस्टरों में देखी इस जगह को जब सामने पाया तो वाकई कुछ हटकर लगी। सर्पीली, घुमावदार, तीखी ढलान वाली सड़क पर आठ नुकीले मोड़..इर्द गिर्द सुंदर फूल..यह दुनिया की सबसे कुटिल मोड़ों वाली सड़क कही जाती है। पूर्व से पश्चिम की ओर पहले 27 डिग्री कोण की ढलान थी, जिसे बाद में थोड़ा कम किया गया। ऊपर से केवल नीचे की ओर ही कारें जा सकती हैं। फोटो में यह नजारा कहीं ज्यादा खूबसूरत दिखता है, इसलिए पर्यटक ढलान पर कई जगह खड़े होकर फोटो खिंचवाते नजर आते हैं।

पैलेस ऑफ फाइन आर्ट्स

हम कार के जरिए शहर घूम रहे थे, इसलिए एक छोर से देखना शुरू किया। करीब दस मिनट के बाद हम पहुंचे पैलेस ऑफ फाइन आर्ट्स्। ललित कला का यह महल 1915 की पनामा प्रशांत प्रदर्शनी की अंतिम संरचना है। ऐतिहासिक स्थानों के राष्ट्रीय रजिस्टर पर सूचीबद्ध, यह कलात्मक, खूबसूरत इमारत एक लैगून पर स्थित है, जिसके पानी में इसका अक्स नजर आता है। अब यहां कला प्रदर्शनियां लगती हैं। बस इमारत ही देखने लोग पर्यटक यहां ज्यादा आते हैं।

कब जाएं

सितंबर- अक्टूबर या मई-जून में। इन महीनों के दौरान यहां मौसम बहुत अच्छा होता है। 

Posted By: Priyanka Singh

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