क्या होता है 'गोल्डन चाइल्ड सिंड्रोम', जो दीमक की तरह खोखला कर देता है परिवार की नींव?
हर परिवार में माता-पिता अपने सभी बच्चों से प्यार करते हैं, लेकिन कभी-कभी अनजाने में, एक बच्चा 'आंखों का तारा' ...और पढ़ें

क्या आप भी अपने बच्चे को बना रहे हैं 'गोल्डन चाइल्ड'? (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जरा एक फैमिली डिनर का नजारा याद कीजिए। सब लोग हंस रहे हैं, बातें कर रहे हैं, लेकिन कमरे में सारी 'लाइमलाइट' सिर्फ एक ही बच्चे पर है। "अरे, हमारे रोहन को देखो, यह तो क्लास में फर्स्ट आया है, यह तो सबसे समझदार है, यह कभी गलती नहीं करता!"
रिश्तेदारों के बीच उस एक बच्चे को किसी 'प्रिंस' या "प्रिंसिस" की तरह पेश किया जाता है। उसकी हर छोटी बात पर तालियां बजती हैं, जबकि उसी घर का दूसरा बच्चा कोने में चुपचाप बैठा होता है- अनदेखा और उपेक्षित।
ऊपर से देखने में यह सिर्फ 'ज्यादा प्यार' लग सकता है, लेकिन मनोविज्ञान की दुनिया में यह एक खतरनाक संकेत है। इसे कहते हैं- 'गोल्डन चाइल्ड सिंड्रोम' (Golden Child Syndrome)। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं आखिर क्यों यह इतना खतरनाक है।

(Image Source: AI-Generated)
आखिर कौन होता है 'गोल्डन चाइल्ड'?
गोल्डन चाइल्ड वह बच्चा है जिसे माता-पिता अपनी खुद की छवि का विस्तार मानते हैं। यह बच्चा सिर्फ बच्चा नहीं होता, बल्कि माता-पिता का 'ईगो' बन जाता है।
अगर बच्चे ने क्लास में टॉप किया, तो माता-पिता को लगता है कि उन्होंने टॉप किया है। इस बच्चे की हर गलती को नजरअंदाज कर दिया जाता है और उसकी हर छोटी उपलब्धि को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। उसे यह महसूस कराया जाता है कि वह परिवार का सबसे खास बच्चा है।
सुनहरे पिंजरे में कैद बचपन
आपको लग रहा होगा कि गोल्डन चाइल्ड होना तो बहुत अच्छी किस्मत की बात है, है ना? बिल्कुल नहीं!
- असल में, उस बच्चे पर हमेशा 'परफेक्ट' बने रहने का भयानक दबाव होता है। उसे अपनी मर्जी से जीने की इजाजत नहीं होती। उसे वही करना पड़ता है जिससे माता-पिता खुश हों।
- उसे गलती करने का डर हमेशा सताता रहता है।
- उसकी अपनी कोई पर्सनैलिटी नहीं बन पाती।
- बड़े होकर ऐसे बच्चे अक्सर चिंता और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर वे सफल नहीं हुए, तो कोई उन्हें प्यार नहीं करेगा।
परिवार की नींव में लगती 'दीमक'
यह सिंड्रोम सिर्फ उस एक बच्चे को खराब नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार को दीमक की तरह चाट जाता है:
- भाई-बहनों में नफरत: जब एक बच्चे को राजा की तरह और दूसरे को प्रजा की तरह रखा जाता है, तो भाई-बहनों के बीच प्यार की जगह जलन और नफरत ले लेती है। इसे 'Sibling Rivalry' कहते हैं जो ताउम्र खत्म नहीं होती।
- उपेक्षित बच्चे: घर के बाकी बच्चे खुद को बेकार और कमतर समझने लगते हैं। उनका आत्मविश्वास खत्म हो जाता है।
- रिश्तों में दिखावा: ऐसे घरों में प्यार 'शर्तों' पर मिलता है। "तुम अच्छा करोगे, तभी हम तुम्हें प्यार करेंगे"- यह सोच रिश्तों की गर्माहट को खत्म कर देती है।
क्या है समाधान?
माता-पिता को यह समझना होगा कि बच्चे उनकी ट्रॉफी नहीं हैं। हर बच्चे की अपनी खूबी और खामी होती है। गोल्डन चाइल्ड सिंड्रोम को खत्म करने का एक ही तरीका है- समानता। यानी बच्चों को उनकी उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि उनके 'होने' के लिए प्यार करें। घर को एक प्रतियोगिता का मैदान न बनाएं, बल्कि एक सेफ स्पेस ही रहने दें।
