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"सॉरी बोलेंगे तो बच्चा सिर पर चढ़ जाएगा!" पेरेंट्स की इसी जिद से खोखले होते हैं रिश्ते, जिंदगी भर रहता है पछतावा

Published: Sun, 11 Oct 2026 08:29 AM (IST)

बच्चों के साथ अटूट रिश्ता बनाने के लिए माता-पिता हर प्रयास करते हैं मगर जब खुद गलती करते हैं तो ...और पढ़ें

बच्चे से 'सॉरी' कहने में होती है हिचक? (Image Source: AI-Generated)

बच्चे से 'सॉरी' कहने में होती है हिचक? (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. माफी मांगने से बच्चों का सम्मान और भरोसा बढ़ता है

  2. उम्र के अनुसार माफी का तरीका अपनाना महत्वपूर्ण है

  3. अपनी गलती स्वीकारना बच्चों को जिम्मेदारी सिखाता है और उन्हें सशक्त बनाता है

डॉ. रचना खन्ना सिंह, नई दिल्ली। ऑफिस से जैसे ही दीप्ति लौटकर आईं, उनकी 12 साल की बेटी रिद्धि अपने स्कूल फनगेम्स के बारे में बताने लगी। तनावपूर्ण दिन के बाद अति उत्साहित रिद्धि पर दीप्ति का सारा गुस्सा निकल गया। दीप्ति को भी पता था कि उनसे गलती हो गई मगर वो समझ नहीं पा रही थीं कि अब क्या करें! हर माता-पिता की यह चाहत होती है कि उनका बच्चों के साथ मजबूत, दोस्ताना और भरोसेमंद रिश्ता हो, लेकिन अक्सर पैरेंटिंग के दौरान ऐसा मोड़ आता है जब हम अपना आपा खो बैठते हैं-चाहे वह काम का तनाव हो या दिनभर की थकान। चिल्लाने या डांटने के बाद दिल में एक कसक रह जाती है। ऐसे में कई माता-पिता के मन में यह डर रहता है कि अगर वे बच्चे से माफी मांगेंगे, तो उनका दबदबा कम हो जाएगा या बच्चा उन्हें कमजोर समझने लगेगा। जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। बच्चों से दिल से मांगी गई माफी आपके अधिकार को घटाती नहीं, बल्कि आपके प्रति उनके सम्मान, भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा बनाती है।

रिश्ते की मरम्मत है जरूरी

अक्सर हम सख्त अनुशासन और सकारात्मक प्रभाव के बीच का अंतर भूल जाते हैं। सख्त अनुशासन केवल नियंत्रण और हुकुम चलाने पर टिका होता है, जबकि सकारात्मक पैरेंटिंग में प्यार, संवेदनशीलता और स्पष्ट सीमाओं के साथ-साथ अपनी जवाबदेही भी होती है। जब आप बच्चे से कहते हैं, 'बेटा, आज मुझसे गलती हुई, मुझे तुम पर चिल्लाना नहीं चाहिए था' तो आप अपनी अथारिटी खो नहीं रहे होते बल्कि बच्चे के सामने बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहे होते हैं कि गलतियां इंसान से ही होती हैं और अपनी गलती को स्वीकारना और अपने गुस्से पर काबू पाना असली समझदारी है। पैरेंटिंग में मतभेद और तनाव आना स्वाभाविक है। असली बात यह है कि आप उस रिश्ते की मरम्मत कैसे करते हैं।

जैसी उम्र वैसा तरीका

हर उम्र में बच्चे की सोचने और समझने की क्षमता अलग होती है। इसलिए आपकी माफी का तरीका भी बच्चे की उम्र के अनुकूल होना चाहिए। बच्चा अगर 3 से 5 साल का हो तो छोटा और सरल संदेश हो। छोटे बच्चों को लंबे स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं होती। उनके लिए केवल सुरक्षा और सांत्वना जरूरी है। उदाहरण: 'मैंने आज जोर से चिल्लाया और तुम डर गए। मुझे माफ कर दो बेटा, अब मैं बिल्कुल शांत हूं।' छह से 11 साल के बच्चे कारणों को समझने लगते हैं। यहां आप अपनी गलती मानने के साथ आगे सुधार का तरीका बता सकते हैं। उदाहरण: 'आज मैं काम की वजह से बहुत परेशान था और वो गुस्सा तुम पर निकल गया। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। अगली बार से जब मुझे गुस्सा आएगा, तो मैं बात करने से पहले थोड़ा ब्रेक लूंगा।' टीनएजर्स निष्पक्षता और आत्म-सम्मान को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं। वे बहाने तुरंत पकड़ लेते हैं। इसलिए कभी यह न कहें कि मैं माफी मांगता हूं, लेकिन तुमने मुझे गुस्सा दिलाया था।' इससे आपकी माफी बेअसर हो जाती है। ऐसे में अपनी गलती की सीधी जिम्मेदारी लें और तुरंत माफी के बदले अपने व्यवहार में बदलाव लाकर दिखाएं।

कहें वही जो है सही

बच्चों पर बहुत ज्यादा कठोरता या चिल्लाना उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर नकारात्मक असर डालता है। जब माता-पिता अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेते हैं, तो बच्चे अपनी भावनाओं को छिपाने के बजाय खुलकर व्यक्त करना सीखते हैं। बच्चे अपनी गलतियों पर झूठ बोलने के बजाय जिम्मेदारी लेना सीखते हैं। वे दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील और दयालु बनते हैं। हां, आपको हर बात पर माफी मांगने की जरूरत नहीं है। सही नियमों और सीमाओं के लिए कभी माफी न मांगें। अगर आप बच्चे को स्क्रीन टाइम कम करने, सही समय पर सोने या पढ़ाई करने के लिए कहते हैं और बच्चा उदास होता है, तो इसके लिए माफी मांगने की जरूरत नहीं है।

जब खो दें आपा

  • पहले खुद को शांत करें। शांत होने के बाद ही बच्चे के पास जाएं।
  • बिना किसी बहाने के अपनी गलती स्वीकारें। 'मैंने तुम पर चिल्लाया और वह गलत था।'
  • बच्चे पर पड़े असर को समझें। 'तुम्हें बहुत बुरा और डर लगा होगा।'
  • माफी को मूल समस्या से अलग रखें। 'हमें तुम्हारे व्यवहार पर बात करनी है, लेकिन मेरा चिल्लाना गलत था।'
  • बताएं कि अगली बार आप क्या अलग करेंगे। 'अगली बार गुस्सा आने पर मैं पहले शांत होने के लिए 5 मिनट रुकूंगा।'
  • बच्चे को आश्वस्त करें। 'आई लव यू, और नाराज होने पर भी मेरा प्यार तुम्हारे लिए कम नहीं होता।'
  • अपने कहे अनुसार अपने व्यवहार में बदलाव लाएं।

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