जीवन के हर मोर्चे पर कई मुश्किलों से जूझते हुए कोविड-काल के बाद अब हम निराशा भरे दौर से बाहर निकलने की कोशिश में जुटे हैं। आज दशहरे का त्योहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है तो फिर इस अवसर पर हम भी लेते हैं, 10 ऐसे शुभ-सकारात्मक संकल्प, जो हमें स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल और संवेदनशील बनाएंगे।

स्व-अनुशासन की शक्ति

अगर हम जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें अपने लिए अनुशासन के कुछ स्पष्ट नियम बनाने चाहिए और उनके पालन के मामले में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

स्वच्छ रहने का संकल्प

हमारे आसपास साफ-सफाई रहेगी, तभी हम स्वस्थ रहेंगे। आज जब समूचा विश्व कोरोना वायरस से जूझ रहा है, तो ऐसी स्थिति में हर नागरिक की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने आसपास के माहौल को साफ-सुथरा बनाए रखें।

बांटें दूसरों का दुख दर्द

अपनी समस्या तो सभी को बड़ी लगती है, लेकिन हमें अपने आसपास मौजूद लोगों के दुख-दर्द को समझते हुए उसे भी बांटने की कोशिश करनी चाहिए।

बातचीत कर दूर करेंगे तनाव

अजीब विडंबना है कि इंटरनेट मीडिया पर लोग अपनी दिनचर्या से जुड़ी छोटी-छोटी बातें वहां मौजूद अपने दोस्तों के साथ शेयर करते हैं, लेकिन एक छत के नीचे रहने वाले अपने परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत के लिए लोगों के पास फुर्सत नहीं होती। यह तनाव का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन इस समस्या की ओर ज्यादातर लोगों का ध्यान नहीं जाता।

बनेंगे वक्त के पाबंद

समय के लिए अक्सर यही कहा जाता है कि टाइम इज मनी। वास्तव में समय पैसे से भी ज्यादा कीमती है क्योंकि अपने खर्च में कटौती करके हम पैसों का संग्रह तो कर सकते हैं लेकिन बीता हुआ वक्त कभी भी लौटकर नहीं आता। तो समय की कीमत समझें और उसका सदुपयोग करते हुए जीवन में कामयाबी हासिल करने का प्रयास करें।

स्क्रीन टाइम में करें कटौती

यह सच है कि कोविड-काल के बाद इंटरनेट मीडिया पर निर्भरता बढ़ गई है। बच्चों की पढ़ाई और ऑफिस के कामकाज की वजह से लोगों को अपना अधिकांश समय मोबाइल और लेपटॉप पर बिताना पड़ता है। ऐसी स्थिति में स्व-अनुशासन बेहद जरूरी है। अपने प्रोफेशन को देखते हुए तय करें कि रोजाना कितना वक्त इंटरनेट पर बिताना है।

लापरवाही से करें तौबा

अव्यवस्थित लाइफस्टाइल और दिनचर्या की वजह से कुछ लोग अपनी चीज़ें इधर-उधर रखकर भूल जाते हैं। फिर उन्हें ढूंढने में काफी समय बर्बाद होता है। तो अपनी चीजें सही जगह पर व्यस्थित ढंग से रखने की आदत डालें। सारे जरूरी नंबर और पासवर्ड एक छोटी डायरी में नोट करके, उसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखें।

बच्चों को हारना भी सिखाएं

हर अभिभावक का यही सपना होता है कि उनकी संतान हर एक्टिविटी में सबसे आगे रहे, पर यह हमेशा संभव नहीं होता। जीत की तरह हार भी जिंदगी का जरूरी हिस्सा है। इसलिए हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने बच्चों को हारना भी सिखाएं।

माफ करना सीखें

किसी भी रिश्ते में तनाव और दरार की सबसे वजह है अहं। हर इंसान स्वयं को सही और दूसरों को गलत समझता है। अगर लोग अपनी भूल को स्वीकारना और दूसरों की गलतियों माफ करना सीख जाएं तो सारी कटुता दूर हो जाएगी।

हर हाल में रहें खुश

प्रसन्नता और खिन्नता मन के भाव हैं औऱ मन पर नियंत्रण इंसान के हाथ में है। इसलिए हर हाल में खुश रहना सीखें।

Edited By: Priyanka Singh