वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान

निकल कर आँखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान

नई दिल्ली, ब्रांड डेस्क। कवि व लेखक, किसी भी देश व समाज को बेहतर करने के लिए बेहद आवश्यक हैं। इनकी रचनाएं समाज की बुराइयों को दूर करती हैं व उन्हें और भी बेहतर बनाती हैं। लेकिन एक कवि अथवा लेखक अपनी रचना के लिए अत्यंत संघर्ष व त्याग भी करता है। ऊपर लिखी गई पंक्तियों में महान कवियों में से एक सुमित्रानंदन पंत जी यही बात बताने का प्रयास भी कर रहे हैं। हालांकि एक अच्छी कविता तभी सफल हो पाती है जब वह अपने पाठकों तक आसानी से पहुंच सके। अनेकों ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएं तो बेहद शानदार हैं लेकिन वो पाठकों तक पहुंच ही नहीं पातीं।

एक कवि के लिए सीधे तौर पर अपने पाठकों से जुड़ना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसलिए आज Koo App अनेकों कवि व लेखकों की पहली पसंद बन चुका है। सिर्फ चर्चित व प्रसिद्ध कवि और लेखक ही नहीं, बल्कि कई नए लेखक भी इस प्लेटफॉर्म पर उपस्थित हैं और सीधे पाठकों तक अपनी कविता व रचनाएं पहुंचाते हैं। Koo वर्तमान समय में पूरे देश की आवाज बन चुका है और इसी वजह से इस पर हर वर्ग के लोग उपलब्ध हैं। इसके कारण काफी कम समय में कवियों व लेखकों को बड़ी संख्या में फॉलोअर्स भी मिलते हैं। कई कवियों को तो Koo पर 3 लाख से ज्यादा लोग फॉलो कर रहे हैं।

बड़ी संख्या में चर्चित लेखक हैं सक्रिय

Koo आज के समय में देश के चर्चित कवियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इस पर कुमार विश्वास, शिवा ट्रिलजी के लेखक अमीश त्रिपाठी, आचार्य प्रशांत, यात्रा वृतांत के लिए मशहूर अनुराधा गोयल और रतन शारदा जैसे चर्चित लेखक व कवि सक्रिय हैं और अपनी रचनाएं व अन्य अपडेट्स के साथ अपने पाठकों से सीधे जुड़कर संवाद स्थापित करते हैं।

युवा लेखकों की पहली पसंद

अमीश त्रिपाठी की तरह ही अन्य कई युवा लेखकों की भी सक्रियता Koo पर काफी बढ़ी है। नए लेखकों के लिए यह प्लेटफॉर्म एक अवसर की तरह है जहां पर वो अपनी रचनाओं से पाठकों को रूबरू करा सकते हैं। जाहिर तौर पर किसी नए लेखक के लिए किसी मैगजीन अथवा किताब में अपनी रचना प्रकाशित करना एक बेहद ही चुनौती भरा कार्य है। ऐसे में Koo आपके लिए बेहद सहायक हो सकता है। साथ ही यहां पर युवा लेखकों को सीधे उनके पाठकों द्वारा फीडबैक मिलता है जो कि उन्हें और बेहतर लेखक बनने में सहायता करता है।

अपनी भाषा में रचनाएं करें साझा

Koo की प्रसिद्धि के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्धता है। इस प्लेफॉर्म पर आप न सिर्फ हिंदी व अंग्रेजी में बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं में भी अपनी रचनाएं पाठकों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं व उनके विचार जान सकते हैं। आप तमिल, तेलुगू, मराठी, बंगला, कन्नड़, गुजराती आदि भाषाओं में अपने विचार साझा कर सकते हैं। और भी कई अन्य भाषाएं जैसे पंजाबी, उर्दू, उड़िया, मलयालम आदि भी जल्द ही इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही इसके टॉक टू टाइप फीचर के द्वारा आप बोलकर भी अपनी रचनाएं लिख सकते हैं।

कम समय में बढ़ रहे हैं फॉलोअर्स

कई लेखकों के फॉलोअर्स बेहद कम समय में तेजी से बढ़े हैं। जैसे कुमार विश्वास Koo पर सितम्बर 2020 से सक्रिय हैं और वर्तमान समय में इनके 3 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। इसी प्रकार अमीश त्रिपाठी ने फरवरी 2021 में इस प्लेटफॉर्म को ज्वाइन किया था जिस पर अब उनके फॉलोअर्स की संख्या काफी ज्यादा है।

अगर आप भी एक लेखक हैं और अपने पाठकों तक अपनी रचनाएं पहुंचाना चाहते हैं तो Koo आपके लिए एक आदर्श विकल्प साबित होगा। तो फिर देर किस बात की आज ही जुड़ें Koo से और शुरू करें अपने लेखन का सफर। साथ ही देश दुनिया की लेटेस्ट खबरों से जुड़े रहने के लिए Dainik Jagran को Koo पर फॉलो करना न भूलें।

Note - यह आर्टिकल ब्रांड डेस्‍क द्वारा लिखा गया है।

Edited By: Ruhee Parvez