नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। दुनिया भर में कोरोना वायरस को लेकर तमाम तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं। इनमें से कई जानकारियां भ्रामक भी होती हैं। आप सही और गलत जानकारियों के अंतर को तो समझ सकते हैं, लेकिन बच्चों के लिए ऐसा करना अक्सर मुश्किल होता है। ऐसे में जरूरी है कि आपके बच्चे तक सही और तथ्यपरक जानकारी पहुंचे। चूंकि इन दिनों आप घर पर हैं, ऐसे में कोरोना के बारे में बच्चों में वैज्ञानिक समझ विकसित करना आसान और आवश्यक है।

खुलकर बात करें और उन्हें सुनें

अपने बच्चों से कोरोना जैसे विषयों पर खुलकर बात करें। बातों-बातों में उनसे ये जानने की कोशिश करें कि वो इस मुद्दे के बारे में क्या जानते हैं। अगर आपको लगता है कि कोरोना के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, तो इस मुद्दे को बेवजह उखाड़ें नहीं। ड्राइंग, कहानी आदि के जरिए उनके विचारों को जानने का प्रयास करें। सबसे प्रमुख बात यह है कि उनके मन में उठ रहे सवालों को नजरअंदाज न करें। उनको कभी भी ऐसा न लगे कि आप उनके सवालों को महत्व नहीं दे रहे हैं। यूनीसेफ के विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे आपसे इस तरह के सवाल पूछ सकते हैं जिसके लिए आपको तैयार रहना होगा-

1-मेरा स्कूल क्यों बंद है?

2-वायरस क्या है?

3-वो कैसा दिखता है?

4-वो कहां छिपता है?

5-मुझे घर पर क्यों रहना है?

6-मैं क्या कर सकता हूं?

7-मुझे अपने हाथ बार-बार क्यों धोने हैं?

8-मैं अपने दोस्तों के साथ क्यों नहीं जा सकता? 

आपकी जानकारी पुख्ता हो

माता-पिता के सामने कई बार इस तरह की स्थितियां आती रहती हैं, जिनमें बच्चों के सवालों के जवाब देना मुश्किल होता है। माता-पिता पूरी कोशिश करते हैं कि बच्चों को आसान तरीके से इन बातों को समझा सकें।

माता-पिता याद रखें कि कोरोना वायरस के बारे में बच्चों से बात करने से पहले जितना हो सके, अपनी जानकारी पूरी रखें। सरकार द्वारा जारी की जा रही सलाह पर नज़र रखें। यूनीसेफ के जैकब हंट कहते हैं कि बच्चों की उम्र के हिसाब से भाषा का प्रयोग करें। उनके हाव-भाव देखते रहें। अगर आपके पास उनके सवालों के उत्तर नहीं हैं तो अंदाजा न लगाएं। बेहद जरूरी है कि आप डब्ल्यूएचओ (https://www.who.int/), यूनीसेफ (https://www.unicef.org/coronavirus/covid-19), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (https://www.mohfw.gov.in/) आदि से अपनी जानकारी को पुख्ता करें।

एम्स के मनोचिकित्सक डॉ. नंद कुमार कहते हैं कि उन्हें इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए कि मास्क लगाने से क्या होता है? वायरल इंफेक्शन कैसे फैलता है? सोशल डिस्टेंसिंग क्या है? आदि। डॉ कुमार कहते हैं कि यह जानना बेहद आवश्यक है कि बच्चों को कौन सी जानकारी देनी है और कौन सी नहीं। उनको बताएं कि वायरस से दूरी बनानी है।

आश्वस्त करते रहें और पॉजिटिव रखें

जब आप अपने आस-पास और टेलीविजन में घट रहे असामान्य घटनाक्रमों को देखते हैं तो लगता है कि सही नहीं चल रहा है। बच्चों के लिए ये अंतर करना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन सी तस्वीर कितनी सही है। एम्स के मनोचिकित्सक रोहित वर्मा कहते हैं कि काफी आवश्यक है कि बच्चों को नकारात्मक खबरों से दूर रखें। 8 साल से ज्यादा की उम्र के बच्चे तकनीक में काफी एडवांस होते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि उन्हें गेम्स, एक्टिविटीज या कुछ सकारात्मक पहल से जोड़ा जाए। वर्मा कहते हैं कि मौजूदा आपाधापी के दौर में जहां पैरेंट्स वर्किंग होते हैं और बच्चे कोचिंग-ट्यूशन और स्कूल में बिजी होते हैं, ऐसे में इस लॉकडाउन के दौरान कुछ अच्छे पल बिताए जाएं। कई घरों में तीन पीढ़ियां एक साथ रह रही होंगी, उनके लिए भी यह एक सुनहरा मौका है। एएसआईएससी बोर्ड के सेक्रेटरी ट्रेजरर और हडर्ड स्कूल के प्रिंसिपल के. वी. विंसेट कहते हैं कि इस दौर में बच्चों की रीडिंग हैबिट को भी बेहतर किया जा सकता है। जरूरी नहीं है कि वे सिर्फ कोर्स की किताबें ही पढ़ें, वो जानकारी बढ़ाने वाली चीजों को भी पढ़ें। विंसेंट सुझाव देते हैं कि बच्चों को नए माहौल में खुद को समायोजित कर सकने की प्रेरणा भी दें।

लॉकडाउन में बनाएं रुटीन

एम्स के मनोचिकित्सक डॉ नंद कुमार कहते हैं कि लॉकडाउन पीरियड में बच्चों का दो-हफ्ते का रूटीन बनाएं। इस समय में उनको मानसिक तौर पर दृढ़ बनाने की जरूरत है।

साथ ही हर परिस्थिति के अनुसार सामंजस्य बिठाने के अनुरूप तैयार करने की जरूरत है। इस समय वे अपनी पेंटिंग, क्रिएटिव राइटिंग, जीके आदि को बेहतर बना सकते हैं। मानसिक दृढ़ता बेहतर करने के लिए उन्हें घर के कामों में शामिल करने की आवश्यकता है। उन्हें घर की सफाई के काम, बर्तन धोने आदि में लगाया जाना चाहिए। एएसआईएससी बोर्ड के सेक्रेटरी ट्रेजरर और हडर्ड स्कूल के प्रिंसिंपल के वी विंसेंट कहते हैं कि यह बेहतर समय है कि पूरा परिवार एक साथ बैठकर खाना खाए। कोई जानकारी बढ़ाने वाली और फनी मूवी देखें। ताकि किसी भी तरह की निगेटिविटी बच्चों में न आए। इसके अलावा, बच्चों का रूटीन खराब न होने दें। विभिन्न यू-ट्यूब लेक्चर से भी उनको अपडेट करें।

फिजिकल एक्टिविटीज पर दें ध्यान

लॉकडाउन के समय इस बात की बड़ी संभावना है कि बच्चों की शारीरिक गतिविधि कम हो जाए। ऐसे में जरूरी है कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। डॉ नंद कुमार कहते हैं कि बच्चों को हेल्दी डाइट देने और जंक फूड से दूर रखने की आवश्यकता है। बच्चों को घर में कसरत, योग, श्वास क्रियाएं जैसी शारीरिक गतिविधियां कराई जानी चाहिए। विंसेंट भी बच्चों की शारीरिक गतिविधियों पर जोर देते हुए कहते हैं कि घर पर कुछ ऐसे खेल बच्चों के साथ खेलें, जिनसे उनका शरीर फिट रहे।

Posted By: Vineet Sharan

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