नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। हर साल 8 मार्च को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इसे सबसे  इसे पहली बार अमेरिका के न्यूयार्क शहर में 28 फरवरी, 1909 को मनाया गया था। इसका आयोजन अमेरिका के सोशलिस्ट पार्टी ने किया था। वहीं, रूस में 1917 में महिलाओं ने हक और सम्मान के लिए हड़ताल आयोजित की थी। इसके बाद से दुनियाभर में महिला दिवस मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सम्मान और अधिकार के प्रति लोगों को जागरूक करना है।  इस वर्ष का थीम  “Women in leadership: Achieving an equal future in a COVID-19 world” वूमेन इन लीडरशिप अचिविंग एन इक्वल फ्यूचर इन ए कोविड-19 वर्ल्ड यानी महिला नेतृत्व: कोरोना काल में बराबर भविष्य प्राप्त करना है। आइए, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास और महत्व को जानते हैं-

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

बात सन 1990 की है। जब अमेरिका में पहली बार एक समाजवादी राजनीतिक पार्टी ने एक कार्यक्रम आयोजित कर महिला दिवस मनाया जाने के प्रस्ताव को पारित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलाना था। इसके एक साल बाद 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे दर्जा प्राप्त हुआ। वहीं,  1911 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विश्व के कई देशों में आयोजित किया गया। जबकि, सन 1917 में रूस में महिलाओं ने रोटी-कपड़ा के लिए हड़ताल किया था।

इस हड़ताल की वजह से तत्कालीन सरकार ने महिलाओं को वोट देने के साथ-साथ रोटी कपड़ा भी देने का अधिकार दिया था। उस समय से हर साल महिला दिवस मनाया जाने जाने लगा। हालांकि, महिला दिवस मनाने की तारीखों में अंतर था। तत्काल समय में रूस जूलियन कैलेंडर का प्रयोग करता था। जबकि, विश्व के अन्य देशों में ग्रेगोरियन कैलेंडर प्रचलन में था। इसके बाद 8 मार्च, 1921 को दुनियाभर में एकसाथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व

समाज में महिलाओं को कमजोर माना जाता है। जबकि, महिलाएं पुरुषों से कम नहीं है और कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। आज महिलाओं के सहयोग के चलते समस्त विश्व का चौमुखी विकास हो रहा है। महिलाओं के हौसलों को बुलंद करने और समाज में फैले असमानता को दूर करने के लिए ही हर वर्ष महिला दिवस मनाया जाता है।

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