एक जमाने में मकान बनाते समय सीमेंट-बजरी के साथ 'नमक' भी मंगवाते थे कारीगर, आज की पीढ़ी को नहीं पता होगी वजह
जब भी नए घर का निर्माण होता है, तो कारीगर ईंट, सीमेंट और बजरी जैसी चीजों की लिस्ट थमा देते ...और पढ़ें

घर बनाते समय नमक क्यों मंगवाते थे पुराने कारीगर? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जरा सोचिए, आपके सपनों का घर बन रहा हो और कारीगर ईंट, बजरी और सीमेंट की लिस्ट के साथ आपसे 'नमक' भी मंगवा ले। है ना हैरानी वाली बात? आप यकीनन यही सोचेंगे कि भला घर बनाने में नमक का क्या काम? अगर इसे सीमेंट में मिला दिया, तो सारा मसाला ही खराब हो जाएगा।
हालांकि, कुछ साल पहले तक कारीगरों की पर्ची में नमक का नाम जरूर शामिल होता था। आखिर पुराने कारीगर इस नमक का करते क्या थे? दरअसल, इसके पीछे कोई टोटका नहीं, बल्कि आपको और आपके घर को बिजली के झटकों से बचाने का एक बेहद दिलचस्प और पुराना विज्ञान छिपा था। आइए, डिटेल में समझते हैं इस बारे में।

(Image Source: AI-Generated)
अर्थिंग का पारंपरिक और अनोखा तरीका
पुराने समय में घर को शॉर्ट सर्किट और करंट से सुरक्षित रखने के लिए नमक का इस्तेमाल 'अर्थिंग' बनाने में होता था। इसके लिए घर के बाहर 8 से 10 फीट या उससे भी ज्यादा गहरा गड्ढा खोदा जाता था। उस गड्ढे के भीतर एक जीआई पाइप या तांबे की प्लेट को डाल दिया जाता था। इसके बाद पाइप के इर्द-गिर्द कोयले और नमक की मोटी परतें बिछाई जाती थीं।
इस व्यवस्था में ऊपर से समय-समय पर पानी डाला जाता था, जिससे मिट्टी में लगातार नमी बनी रहे। नमक और कोयला मिलकर मिट्टी को सुचालक बना देते थे, जिससे बिजली आसानी से जमीन के भीतर प्रवाहित हो सके। ऐसे में, अगर घर के किसी तार से करंट लीक होता था, तो वह किसी इंसान को झटका देने के बजाय सीधे जमीन में समा जाता था।
समय के साथ क्यों बंद हो गया यह देसी जुगाड़?
यह पुरानी तकनीक कारगर तो थी, लेकिन कुछ समय बाद कमजोर पड़ने लगती थी। दरअसल, बारिश और ऊपर से डाले जाने वाले पानी के साथ गड्ढे का नमक धीरे-धीरे घुलकर बह जाता था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि नमक की वजह से धातु के पाइप में बहुत जल्दी जंग लग जाती थी। नतीजतन, कुछ ही सालों में इस अर्थिंग की ताकत कम हो जाती थी और यह लंबे समय तक असरदार नहीं रह पाती थी।
अब इस्तेमाल होती है आधुनिक और टिकाऊ तकनीक
आज के समय में नमक वाली अर्थिंग की जगह 'मेंटेनेंस-फ्री' तकनीक ने ले ली है। अब बेहतरीन गुणवत्ता वाले निर्माण में जमीन के अंदर गहराई में कॉपर-बॉन्डेड या जीआई अर्थिंग रॉड लगाई जाती है। इसके चारों तरफ नमक-कोयले के बजाय 'बेंटोनाइट' या 'ईईसी' जैसे खास केमिकल पदार्थ भरे जाते हैं।
इस नई सामग्री की खूबी यह है कि यह बिना नमक डाले ही मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनाए रखती है और करंट को आसानी से जमीन में ट्रांसफर करती है। इस आधुनिक तरीके से रॉड में जंग भी काफी कम लगती है, जिससे अर्थिंग बिना किसी भारी रखरखाव के सालों-साल बेहतरीन काम करती है।
