क्यों दो स्टिक्स के बिना अधूरा माना जाता है डांडिया रास? मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से जुड़ी है इसकी कहानी
नवरात्र के नौ रातों में डांडिया रास किया जाता है। इसमें दो लकड़ियों के स्टिक्स को आपस में टकरा कर गोल घूमते हुए डांस किया जाता है।

क्यों किया जाता है डांडिया? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात का लोक नृत्य डांडिया दुनियाभर में मशहूर हो चुका है। ये नृत्य नवरात्र के दौरान किया जाता है, जिसमें डांडिया की खनक से बहुत खुशनुमा माहौल बन जाता है।
गानों की तेज बीट्स पर गोल घेरे में डांडिया करते हुए लोग मां अंबे की अराधना करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस डांस की शुरुआत कैसे हुई थी? आइए जानें डांडिया रास के पीछे की कहानी क्या है और ये क्यों किया जाता है।
क्या है डांडिया रास का इतिहास
माना जाता है कि डांडिया का सीधा संबंध मां दुर्गा से है। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ था, जिसमें अंत में देवी असुर का वध करती हैं। इसी युद्ध से डांडिया को जोड़ा जाता है। कहते हैं कि डांडिया को मां दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध में इस्तेमाल हुए तलवारों और ढालों की तरह देखा जाता है और इसलिए लोग इन्हें आपस में टकराकर डांडिया खेलते हैं।
क्यों किया जाता है ये नृत्य?
डांडिया नवरात्र के नौ दिनों में खेला जाता है। युद्ध में मां दुर्गा की जीत हुई थी। इसलिए अच्छाई की विजय का जश्न मनाने के लिए डांडिया किया जाता है। साथ ही, ये मां अंबे की अराधना का भी प्रतीक है। लोग गोल घेरे में घूमते हुए डांडिया करते हैं और मां की पूजा करते हैं।
इतना ही नहीं, डांडिया एकता का भी प्रतीक है। नवरात्र के नौ दिन सभी भेदभाव भूलकर लोग एक साथ घेरा बनाकर डांडिया करते हैं और शक्ति की अराधना करते हैं।
कैसे किया जाता है डांडिया?
गरबा की ही तरह डांडिया भी गोल घेरे में किया जाता है। घेरे के बीच में मिट्टी के मटके में जलता हुआ दीया रखा जाता है, जो शक्ति और जीवन का प्रतीक माना जाता है। गोल घेरे में गानों की ताल पर लोग एक लय में डांडिया खेलते हैं। आमतौर पर लोग डांडिया जोड़े में खेलते हैं और अपनी-अपनी पोजीशन बदलते हुए गोल घेरे में घूमते हैं।
डांडिया की पोशाक कैसी होती है?
डांडिया करते हुए महिलाएं रंग-बिरंगी चनिया चोली पहनती हैं। घेरदार चनिया पर मिरर वर्क, गोटा-पत्ती, कच्छी कढ़ाई और कौड़ियों का सुंदर काम होता है। इसके साथ ऑक्सीडाइज्ड जूलरी पहनी जाती है, जो चनिया-चोली के साथ बहुत खूबसूरत लगती हैं।
पुरुष धोती और एक छोटा घेरदार कुर्ता पहनते हैं, जिसपर शीशे और कढ़ाई का काम होता है। इसके साथ वो सिर पर रंग-बिरंगी बांधनी पगड़ी पहनते हैं।
