देवभूमि में लोग एक-दूसरे पर क्यों मलते हैं दही-मक्खन? कुदरत का आभार जताने से जुड़ा है ये अनोखा उत्सव
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल में अनोखा बटर फेस्टिवल मनाया जाता है, जिसे अंदूरी उत्सव कहते हैं।

उत्तरखंड का बटर फेस्टिवल (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम अपनी शहरी दुनिया से बोर होकर पहाड़ों की तरफ भागते हैं, पर मुश्किल ही यहां की अनोखी लोक परंपराओं के बारे में जानते हैं। जबकि यही रीति-रिवाज और रस्में क्षेत्रीय संस्कृति को जीवंत रखने का काम करती हैं।
आज हम देवभूमि उत्तराखंड की ऐसी ही एक अनोखी परंपरा के बारे में बात करने वाले हैं, जिसमें लोग एक-दूसरे पर मक्खन और छाछ फेंककर होली मनाते हैं। जी हां, यह त्योहार कहने को होली जैसा है, पर होली से बहुत अलग है क्योंकि इसमें रंग नहीं दूध से बनी चीजें शामिल हैं।
क्या है उत्तरखंड का बटर फेस्टिवल?
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल, करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। यहां हर साल एक अनोखे उत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसे लोग बटर फेस्टिवल के नाम से जानते हैं। वहीं, स्थानीय भाषा में इस उत्सव को अंदूरी या अढूंडी उत्सव या मक्खन की होली कहा जाता है। सबसे खास बात यह है कि अंदूरी उत्सव किसी देवी-देवता को नहीं, बल्कि पूरी तरह से कुदरत को समर्पित है।
क्यों खेली जाती हैं मक्खन की होली?
दयारा बुग्याल से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर रैथल गांव है। यहां के निवासी हर साल गर्मियों का मौसम शुरू होते ही अपने मवेशियों को चराने के लिए दयारा के हरे-भरे घास के मैदानों में ले जाते हैं। कुछ महीनों तक ये लोग यहीं छावनियों में रहते हैं।
इस बुग्याल में उगने वाली जड़ी-बूटियां और घास मवेशियों की सेहत में सुधार करती हैं। जिससे दूध का उत्पादन भी अच्छी खासी मात्रा में होता है। ऐसे में जब बुग्याल में सर्दियां दस्तक देने लगती हैं, तो स्थानीय लोग जब अपने मवेशियों और दूध से बनी चीजों को लेकर लौटते हैं, तो इस खुशी में बटर फेस्टिवल मनाया जाता है।
कुदरत का जताते हैं आभार
जब गांव के लोग लौटते हैं तो वो बुग्याल से जाते-जाते कुदरत और मवेशियों के रक्षक भगवान कृष्ण का आभार जताते हैं। यही वजह है कि हर साल भाद्रपद महीने की संक्रांति को मक्खन होली मनाई जाती है। उत्सव की शुरुआत स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा और अनुष्ठान से होती है। इसके बाद लोग पारंपरिक रूप से दूध और उससे बनी चीजें जैसे- दही, मक्खन, छाछ को एक-दूसरे के चेहरों के साथ ही कपड़ों पर मलते हैं।
