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क्या है सोशल मीडिया पर वायरल ‘गर्ल मैथ्स’? कोई फॉर्मूला नहीं, शॉपिंग के खर्च को सही ठहराने का है मजेदार तरीका

Published: Thu, 01 Oct 2026 03:44 PM (IST)

सोशल मीडिया पर वायरल 'गर्ल मैथ्स' एक दिलचस्प ट्रेंड है, जो खरीदारी के खर्च को सही ठहराने और अफसोस से बचने का एक मजेदार तरीका है।

क्या है गर्ल मैथ्स का लॉजिक? (AI Generated Image)

क्या है गर्ल मैथ्स का लॉजिक? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर आए दिन नए ट्रेंड्स देखने को मिलते रहते हैं। इन्हीं में एक दिलचस्प ट्रेंड गर्ल मैथ्स का भी है। आपने कई पोस्ट्स और रील्स में इस शब्द का इस्तेमाल होते हुए सुना या देखा होगा। आजकल ये लोगों की आम बोलचाल का हिस्सा भी बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका मतलब क्या है। 

इस शब्द को सुनकर ऐसा लग सकता है कि ये मैथ्स से जुड़ा कोई फॉर्मूला होगा, लेकिन असल में ये पैसों की खर्च और बजत को लेकर बनाया गया एक मजेदार शब्द है, जिसके बारे में जानकर आपको हंसी भी आ सकती है। आइए जानें क्या होता है गर्ल मैथ्स।

क्या है गर्ल मैथ्स?

गर्ल मैथ्स असल में शॉपिंग और बजट को देखने का एक अनोखा तरीका है, जिसमें हम अपने खर्च किए हुए पैसों को ऐसे रेशनलाइज्ड तरीके से आंकते है कि हमें अफसोस भी न हो और हम अपनी पसंद की चीज भी ले लें।

हालांकि, गर्ल मैथ्य सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है। ये हर उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो अपनी छोटी-छोटी खुशियों के लिए बजट से थोड़ा बाहर जाकर खर्च करता है और खुद को सही ठहराने के लिए लॉजिक निकालता है।

जैसे- अगर आप अपने डिजिटल वॉलेट में जमा पैसे या कैश से पेमेंट कर रहे हैं, तो उस पैसों को बैंक अकाउंट से कटा हुआ नहीं माना जाएगा। इसे ऐसे समझा जाता है जैसे वो चीज मुफ्त में मिली है। 

एक दूसरा उदाहरण ये हो सकता है कि अगर आपको किसी सामान को रिटर्न करने पर रिफंड मिला है और आप तुरंत उन पैसों से कुछ खरीद लेते हैं, तो गर्ल मैथ के मुताबिक ये दूसरा सामान मुफ्त में मिला हुआ माना जाता है। 

एक और उदाहरण ये हो सकता है कि आपने 400 रुपए का कोई सामान खरीदा, लेकिन उस पर 50 रुपए डिलिवरी चार्ज लग रहा था। अब उन 50 रुपए को बचाने के लिए आपने 100 रुपए का सामान और कार्ट में जोड़ दिया, जिससे कुल खर्च 500 रुपए हो गए और आपके डिलिवरी के 50 रुपए बच गए। इसे सेविंग की तरह देखा जाता है कि आप बेकार में 50 रुपए देने से बच गए। 

इसके पीछे का लॉजिक क्या है? 

भले ही इसे मजाकिया अंदाज में गर्ल मैथ्स का नाम दिया गया है, लेकिन इसके पीछे काफी दिलचस्प लॉजिक छिपे हैं। पैसे खर्च करने पर इंसान का दिमाग एक तरह के स्ट्रेस में जाता है कि बहुत फिजूल खर्च तो नहीं कर रहे। गर्ल मैथ्स इस स्ट्रेस को कम करने और खरीददारी के बाद होने वाले अफसोस को दूर करने का एक साइकोलॉजिक ट्रिक है। 

गर्ल मैथ के पीछे एक लॉजिक कॉस्ट-पर-यूज भी है यानी किसी चीज की लंबे समय के इस्तेमाल के हिसाब से उसकी कीमत लगाना। अगर आप कोई महंगी चीज खरीदते हैं, लेकिन वो काफी टिकाऊ है, तो ये सस्ती लेकिन बार-बार खराब होने वाली चीज से ज्यादा बेहतर और किफायती है।