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40 साल तक गायब रही ‘टुटू’, फिर लंदन के एक घर में मिली; हैरान करने वाली है नाइजीरिया की इस पेंटिंग की कहानी

Published: Tue, 15 Sep 2026 09:23 AM (IST)

नाइजीरिया की मशहूर 'टुटू' पेंटिंग देश की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। 40 साल तक गायब रहने के बाद 2017 में लंदन में मिली।

नाइजीरिया की मशहूर टुटू पेंटिंग (Picture Courtesy: Instagram)

नाइजीरिया की मशहूर टुटू पेंटिंग (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कला सिर्फ कैनवस पर बिखरे रंग नहीं होती। ये किसी देश की संस्कृति, इतिहास और उसकी पहचान को भी बयां करती है। इसलिए इतिहास को जानने और समझने के लिए आज भी लोग पुरानी पेंटिंग्स को देखना पसंद करते हैं। नाइजीरियाई संस्कृति में ऐसा ही महत्व वहां की मशहूर पेंटिंग टुटू रखती है। 

इस पेंटिंग को नाइजीरिया के मशहूर और आधुनिक कलाकार बेन एनवोनवु ने बनाया था। टुटू सिर्फ एक पोर्ट्रेट नहीं है, बल्कि इसे नाइजीरियन सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का बड़ा प्रतीक माना जाता है। ऐसे में सवाल आता है कि इस पेंटिंग में ऐसा क्या खास है, जो नाइजीरियाई संस्कृति मे इसे इतना अहम स्थान मिला है। आइए जानें इस बारे में।   

क्या बनाता है इस पेंटिंग को खास?

इस पेंटिंग में बनी महिला के चेहरे की कोमलता, रंगों का खूबसूरती से इस्तेमाल और पोर्ट्रेट जैसा रीगल पोश्चर इसे बेहद खास और प्रभावशाली बनाती है। 

इतिहास के पन्नों से जुड़ा गहरा नाता

टुटू पेंटिंग का इतिहास नाइजीरिया के सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रमों से गहराई से जुड़ा हुआ है। 1967 से 1970 के दौरान हुए नाइजीरियाई सिविल वॉर के बाद पूरा देश बुरी तरह से आपस में ही बंट चुका था। ऐसे में इस पेंटिंग ने वहां के लोगों को आपस में जोड़ने का काम किया। 

हालांकि, दिलचस्प बात ये है कि इस पेंटिंग को बनाने वाले कलाकार बेन एनवोनवु खुद इग्बो समुदाय से नाता रखते थे, जबकि जिस टुटू का पोर्ट्रेट उन्होंने बनाया, वह योरूबा शाही परिवार से ताल्लुक रखती थीं। यही वजह है कि इस पेंटिंग ने राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया और नाइजीरिया के इतिहास में अहम हो गई। 

तीन पेंटिंग्स का दशकों पुराना रहस्य

आर्टिस्ट बेन एनवोनवु ने इस शृंखला के तहत कुल 3 पेंटिंग्स बनाई थीं, लेकिन साल 1975 के बाद इन पेंटिंग्स के बारे में कोई भी जानकारी मिलना बंद हो गई और ये अचानक गायब हो गईं। कई सालों तक गुमनाम रहने के बाद, साल 2017 में इसका 1974 वाला एडिशन अचानक लंदन के एक साधारण से घर में मिला। दशकों बाद जब ये पेंटिंग यूं अचानक सामने आई, तो अफ्रीकी कला-जगत की सबसे बड़ी घटना बन गई।