जीजा-साली की हंसी-ठिठोली से भरा है ये हरियाणवी लोकगीत, शादियों में आज भी लगते हैं इस पर जमकर ठुमके
भारतीय शादियों में डांस फ्लोर पर असली मजा तब आता है, जब कोई ठेठ हरियाणवी गाना बजता है।

शादी-ब्याह में गदर मचाता है जीजा की टांग खींचने वाला ये हरियाणवी लोकगीत (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शादी के मंडप से लेकर इंस्टाग्राम की ट्रेंडिंग रील्स तक, हरियाणवी लोकगीतों का क्रेज आज भी कम नहीं हुआ है। 'जीजा तू काला, मैं गोरी घणी...' - शायद ही कोई ऐसा हो जिसके कदम इस चुलबुले गाने की बीट्स पर न थिरके हों। हालांकि, क्या आपने कभी नाच-गाने के बीच, इस गीत में पिरोई गई जीजा-साली की अठखेलियों पर गौर किया है?
चलिए जानते हैं कि आखिर कैसे चौपालों और घरेलू महफिलों में गाया जाने वाला यह देसी गीत आज की हाई-फाई शादियों की शान बन गया है, और इसके मजेदार बोलों के पीछे कौन-सी कहानी छिपी है।

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'जीजा तू काला मैं गोरी घणी' का असल मतलब
यह गाना हरियाणा की पारंपरिक लोक गायन शैली में रचा गया एक बेहद प्रसिद्ध गीत है। शादी-ब्याह के मौके पर गाए जाने वाले गीतों में जीजा-साली के हंसी-मजाक का हमेशा से एक खास स्थान रहा है।
इस मशहूर लोकगीत की सबसे लोकप्रिय पंक्तियां कुछ इस प्रकार हैं:
"जीजा तू काला, मैं गोरी घणी...
फोटो खिंचवावै दोनों जणी..."
इस गाने में एक साली बड़े ही चुलबुले अंदाज में अपने जीजा को चिढ़ा रही है। वह गाते हुए मजाक में अपनी सुंदरता का बखान कर रही है और जीजा के सांवले रंग को लेकर उस पर मीठा तंज कस रही है। मगर इस गीत की असली खूबसूरती इसकी अगली पंक्ति में है- "फोटो खिंचवावै दोनों जणी"।
रंगत का ताना मारने के बावजूद, वह पूरे हक से अपने जीजा के साथ तस्वीर खिंचवाने की जिद कर रही है। यह महज रूप-रंग की बात नहीं है, बल्कि उस लाड़-प्यार, मनुहार और अधिकार का प्रतीक है जो एक साली को अपने जीजा से मिलता है।
इस हरियाणवी लोकगीत में दिखता है जीजा-साली का चटपटा अंदाज
इस लोकगीत के बोल भले ही बहुत सीधे और मजाकिया लगते हों, लेकिन इनके पीछे पारिवारिक रिश्तों की एक मजबूत डोर छिपी है। उत्तर भारतीय और हरियाणवी संस्कृति में दामाद का रुतबा बहुत खास और सम्मानजनक होता है, लेकिन पूरे परिवार में साली ही वो सदस्या होती है जिसे उनके साथ हर तरह की हंसी-ठिठोली करने की पूरी छूट होती है। यह गीत उसी खुशमिजाज रिश्ते की गहराई को दर्शाता है।

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खुलकर नाचने को मजबूर कर देते हैं इस गीत के बोल
इस गाने की बीट्स इतनी जीवंत हैं कि यह तुरंत जुबान पर चढ़ जाता है। जब भी शादियों में महिला संगीत, मेहंदी या भांत का कार्यक्रम होता है, तो ढोलक की थाप पर महिलाएं इस गीत को गाए बिना नहीं रह पातीं। यह गीत महिलाओं और युवतियों को घूंघट की आड़ में भी अपनी खुशी जाहिर करने, खुलकर नाचने और हंसी-मजाक में जीजा की टांग खींचने का एक बेहतरीन जरिया देता है।
आज भी यूथ की पसंद बना हुआ है यह ट्रैक
पहले जो लोकगीत सिर्फ गांव-देहात की चौपालों या दादी-नानी की बैठकों तक सिमटे हुए थे, आज वे फाइव-स्टार होटलों की भव्य संगीत सेरेमनी का भी अहम हिस्सा बन चुके हैं। इंटरनेट और इंस्टाग्राम रील्स के इस दौर ने इन देसी धुनों को एक नया मुकाम दिया है। अब तो आलम यह है कि शादी चाहे कहीं की भी हो, जब तक डीजे पर इस हरियाणवी ट्रैक की बीट्स नहीं गूंजतीं, तब तक डांस फ्लोर पर वो असली एनर्जी नजर ही नहीं आती। नई पीढ़ी के बीच तो यह गाना एक तरह से वेडिंग एंथम बन चुका है, जिसके हुक स्टेप पर डांस किए बिना कोई भी जश्न पूरा नहीं होता।
